
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील पर भले ही भाजपा के पूर्व विधायक प्रमोद उंटवाल ने कई किलोमीटर ई-रिक्शा की सवारी कर ईंधन बचत का संदेश दिया हो। प्रदेश के राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल नमो भारत में बैठकर वीआईपी कल्चर छोड़ने का संदेश देने के साथ ईंधन की बचत कर लखनऊ से अपने गृह जनपद मुजफ्फरनगर पहुंचे हो, लेकिन इन सब के बीच मुजफ्फरनगर के आला अधिकारियों से सरकारी गाड़ियों का मोह नहीं छूट रहा है। गत सोमवार 18 मई 2026 को मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट परिसर में इसकी बानगी देखने का मिली है। एक ओर देश के प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री और खुद जिले के जिलाधिकारी (डीएम) जनता से ईंधन बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की लगातार अपील कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले के आला अफसर और सरकारी बाबू अपने कार्यालय से डीएम कार्यालय तक पहुंचने में भी सरकारी गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल फूंकने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।


बैठक के बहाने कलेक्ट्रेट बना ‘ऑटो एक्सपो’: सोमवार को जिला पंचायत सभागार में लेखपाल भर्ती परीक्षा और अन्य महत्वपूर्ण विषयों को लेकर डीएम की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, कर्मचारी, लिपिक और शिक्षक पहुंचे। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि जनता को सादगी और पर्यावरण का पाठ पढ़ाने वाले ये हुक्मरान अपनी-अपनी भारी-भरकम सरकारी और निजी गाड़ियों के काफिले के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे।

नतीजा यह हुआ कि कुछ ही देर में पूरा डीएम कार्यालय परिसर और उसके आसपास की सड़कें ‘उत्तर प्रदेश सरकार’ लिखी गाड़ियों से खचाखच भर गईं। सायरन और हूटरों की गूंज के बीच गाड़ियों का ऐसा हुजूम उमड़ा, मानो कलेक्ट्रेट परिसर में कोई गाड़ियों का मेला (ऑटो एक्सपो) लगा हो।
अपील सिर्फ जनता के लिए, अफसरों के लिए बेमानी: अधिकारियों और कर्मचारियों की गाड़ियों की यह लंबी कतारें चीख-चीख कर गवाही दे रही थीं कि पर्यावरण संरक्षण और पेट्रोल-डीजल की बचत के नियम सिर्फ आम जनता के पालन करने के लिए हैं। जब सरकारी तंत्र को खुद मिसाल पेश करनी थी, तब कलेक्ट्रेट में सरकारी तेल पर दौड़ने वाली गाड़ियों के जमावड़े ने इन तमाम दावों और अपीलों की पोल खोल कर रख दी।












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