
मिशन 2027 के लिए जातीय समीकरण दुरुस्त, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मुख्यमंत्री की सिफारिश पर लगाई अंतिम मुहर
लोकपथ लाइव, लखनऊ: आखिरकार उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के ठीक छह दिन बाद नए और प्रमोट हुए मंत्रियों के विभागों का रविवार देर रात बंटवारा कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सिफारिश पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंत्रियों के मंत्रालयों की सूची को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी। इस फैसले के साथ ही बीते एक हफ्ते से सचिवालय की दीवारों से लेकर सियासी गलियारों तक चल रही तमाम अटकलों और कयासों पर पूरी तरह से विराम लग गया है।


दिग्गजों को मिली भारी-भरकम जिम्मेदारी
योगी मंत्रिमंडल में शामिल हुए भारी-भरकम चेहरों को उनकी राजनीतिक कमान सौंप दी गई है। संगठन की राजनीति से सरकार में वापसी करने वाले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से इस विभाग को रीढ़ की हड्डी माना जाता है। वहीं हाल ही में समाजवादी पार्टी (सपा) छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले कद्दावर ब्राह्मण चेहरा मनोज पांडेय को खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मनोज पांडेय को मिला यह विभाग सीधे तौर पर राज्य की आम जनता और राशन वितरण प्रणाली से जुड़ा हुआ है, जिससे सरकार की जनहितैषी योजनाओं को जमीन पर उतारने में मदद मिलेगी।

अच्छा काम करने वालों का बढ़ा कद
लखनऊ के जन भवन में 10 मई को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में कुल छह नए चेहरों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। इसके अलावा, पहले से सरकार में शामिल दो राज्य मंत्रियों अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर के कामकाज के बेहतर रिकॉर्ड को देखते हुए मुख्यमंत्री ने उन पर भरोसा जताया है। इन दोनों मंत्रियों को प्रमोट कर ‘राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)’ की बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।
विभागों की आधिकारिक सूची के अनुसार किसे क्या मिला
कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेन्द्र सिंह: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई)
कैबिनेट मंत्री मनोज पाण्डेय: खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति विभाग
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अजीत सिंह पाल: खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग
राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सोमेन्द्र तोमर: राजनैतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल
राज्य मंत्री कृष्णा पासवान: पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग
राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत: ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग
राज्य मंत्री सुरेन्द्र दिलेर: आयकर विभाग
राज्य मंत्री हंस राज विश्वकर्मा:सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग
सोशल इंजीनियरिंग के जरिए ‘चुनावी किलेबंदी’
इस मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के आवंटन के पीछे भाजपा की सुदूरगामी चुनावी रणनीति साफ दिखाई दे रही है। साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले किए गए इस फेरबदल के जरिए पार्टी ने ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का बड़ा दांव खेला है।कैबिनेट में अगड़े, पिछड़े और दलित समाज के प्रतिनिधित्व को बहुत ही संतुलित तरीके से जगह दी गई है। सुरेंद्र दिलेर और कृष्णा पासवान के जरिए जहां दलित समाज को संदेश दिया गया है, वहीं हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत के माध्यम से पिछड़े वर्ग की पैठ मजबूत करने की कोशिश है। इसके अतिरिक्त, संगठन के समर्पित नेताओं और हाल ही में पाला बदलकर आए सहयोगियों को सरकार में उचित स्थान देकर भाजपा ने आगामी चुनावी जंग के लिए अपनी सांगठनिक और प्रशासनिक किलेबंदी को अभेद्य बना लिया है।











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