
सुनामी की लहरों ने मचाई खलबली, पांच स्थानों पर दर्ज की गईं सुनामी की लहरें
लोकपथ लाइव, जकार्ता(इंडोनेशिया): इंडोनेशिया के नॉर्दर्न मोलुक्का सी में गुरुवार (2 अप्रैल) की सुबह कुदरत ने जबरदस्त दस्तक दी। रिक्टर स्केल पर 7.6 की विनाशकारी तीव्रता वाले भूकंप के झटकों ने न केवल इंडोनेशिया बल्कि फिलीपींस और मलेशिया तक के तटीय इलाकों को हिला कर रख दिया। भूकंप के तुरंत बाद समुद्र में सुनामी की लहरें उठने लगीं, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।


इंडोनेशियाई मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, भूकंप के बाद पांच अलग-अलग स्थानों पर सुनामी की लहरें रिकॉर्ड की गईं। सबसे ऊंची लहरें नॉर्थ मिनाहासा (सुलावेसी) में 0.75 मीटर (2.46 फीट) दर्ज की गईं। हालांकि, प्रारंभिक मॉडलिंग में 3 मीटर तक ऊंची लहरों की आशंका जताई गई थी, जिसे बाद में कम कर दिया गया। भूकंप के बाद करीब 50 आफ्टरशॉक्स महसूस किए गए, जिनमें सबसे शक्तिशाली झटका 5.8 तीव्रता का रहा। उधर अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने बताया कि इस क्षेत्र में पिछले 50 वर्षों में 7 या उससे अधिक तीव्रता के नौ भूकंप आ चुके हैं, जो इस इलाके की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। वर्तमान में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।

एक की मौत, चर्च और इमारतें क्षतिग्रस्त
इस आपदा में अब तक एक व्यक्ति की जान जाने की पुष्टि हुई है। माना शहर में खेल प्राधिकरण की एक इमारत गिरने से एक व्यक्ति मलबे में दब गया, जिसकी मौके पर ही मौत हो गई। उत्तर सुलावेसी पुलिस के अनुसार, कई घरों और एक चर्च को मध्यम स्तर का नुकसान पहुंचा है। आपदा प्रबंधन टीमें फिलहाल प्रभावित इलाकों में नुकसान का पूर्ण आकलन करने में जुटी हैं।
भूकंप का केंद्र और भौगोलिक स्थिति
तीव्रता: 7.6 (रिक्टर स्केल)
गहराई: 35 किलोमीटर
केंद्र : फिलीपींस तट से 580 किमी दक्षिण और मलेशिया के सबाह से 1,000 किमी दूर।
कारण: इंडोनेशिया ‘रिंग ऑफ फायर’ (Ring of Fire) क्षेत्र में स्थित है, जो दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है।
प्रशासन की अपील: क्षतिग्रस्त इमारतों में न जाएं
इंडोनेशियाई मौसम विज्ञान एजेंसी के प्रमुख तेकु फैसल फथानी ने कहा कि फिलहाल सुनामी का खतरा टल गया है, लेकिन लोगों को अगले कुछ घंटों तक बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। राष्ट्रीय आपदा एजेंसी ने नागरिकों से अपील की है कि वे क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहें, क्योंकि आफ्टरशॉक्स के कारण कमजोर ढांचे गिर सकते हैं।










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