
भारतीय रेल का ‘मिशन पुलिया’ शुरू: ‘प्री-फैब्रिकेटेड’ तकनीक से 12 घंटे के भीतर पटरी के नीचे तैयार होगा रास्ता
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: भारतीय रेल की पटरियों को पार करते समय होने वाली दुर्घटनाओं को शून्य पर लाने के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक ऐतिहासिक पहल की है। गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय वर्कशॉप में ‘सुविधाजनक रेल पुलिया’ बनाने के मेगा प्लान को हरी झंडी दे दी गई। यह योजना उन ग्रामीण और शहरी बस्तियों के लिए संजीवनी साबित होगी, जहां लोग स्कूल, खेत या शशान घाट जाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर पटरियां पार करते हैं।


रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय वर्कशॉप में देश भर में ‘सुविधाजनक रेल पुलिया’ बनाने का मेगा प्लान पेश किया है। यह पहल उन लाखों लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो रोजमर्रा के कामों के लिए जान जोखिम में डालकर रेलवे पटरी पार करते हैं। पिछले कई दिनों से अधिकारियों के साथ चल रही लंबी मंत्रणा के बाद यह निर्णय लिया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने व्यवस्था को संवेदनशील बताते हुए अधिकारियों से कहा कि हमें आम आदमी की समस्याओं का ऐसा समाधान निकालना है जो आने वाले कई दशकों तक प्रभावी रहे। यह पहल भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और यात्री सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है। वर्कशॉप में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस परियोजना को केवल एक ‘निर्माण कार्य’ नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ बताया।

हाई-टेक निर्माण: 12 घंटे का ‘पावर ब्लॉक’ और रास्ता तैयार
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका निर्माण समय है। रेल मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन पुलियाओं का निर्माण ‘मिशन मोड’ में किया जाए।
प्री-कास्ट स्ट्रक्चर: पुलिया या सबवे का ढांचा पहले ही कारखाने में तैयार कर लिया जाएगा।
क्विक इंस्टालेशन: जिस स्थान पर पुलिया बननी है, वहां ढांचा लाया जाएगा और मात्र 12 घंटे का ‘रेल ब्लॉक’ लेकर पटरी काटकर पुलिया स्थापित कर दी जाएगी। इससे ट्रेनों का आवागमन लंबे समय तक बाधित नहीं होगा।
आम आदमी की जरूरतों का रखा गया ध्यान
रेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह डिजाइन केवल पैदल चलने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि आम आदमी की दैनिक जरूरतों के अनुकूल होगा।
सुगम यातायात: पुलिया के जरिए लोग अपनी साइकिल, मोटरसाइकिल और अन्य जरूरी सामान आसानी से ले जा सकेंगे।
भयमुक्त सफर: डिजाइन इतना सरल और सुरक्षित होगा कि बुजुर्गों और बच्चों को इसे इस्तेमाल करने में कोई झिझक नहीं होगी।
वॉटर-लॉगिंग फ्री: इंजीनियरिंग टीम को खास निर्देश दिए गए हैं कि इन अंडरपास में जलभराव की समस्या न हो, ताकि मानसून के दौरान भी यह रास्ता बंद न हो।
अगले 5-6 वर्षों में देश भर में बिछेगा जाल
रेलवे का लक्ष्य अगले 5 से 6 वर्षों के भीतर देश के उन सभी संवेदनशील ‘ब्लैक स्पॉट्स’ को कवर करना है, जहां पटरियां पार करते समय दुर्घटनाएं होती हैं। यह निर्णय अधिकारियों के साथ कई दिनों तक चली गहन मंत्रणा का परिणाम है।










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