
लोकपथ लाइव, डेस्क। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद का लोनी दुनिया के नक्शे पर सबसे प्रदूषण शहर में शामिल हुआ है। स्विस संगठन IQAir द्वारा 24 मार्च 2026 को जारी ‘वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, लोनी अब दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। रिपोर्ट में शामिल विश्व के 9,446 शहरों में लोनी को प्रदूषण के मामले में नंबर-1 स्थान मिला है, जिसके सुधार के कारण अब तलाशने होंगे।
विश्व के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में कुल पाँच भारतीय शहर शामिल हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश का लोनी और मेघालय का बिरनीहाट, दिल्ली, गाजियाबाद और पश्चिम बंगाल का उला (बिरनगर) शामिल हैं। सूची में दूसरे स्थान पर चीन का होतान है। पाकिस्तान के चार शहर भी “विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों” की सूची में शामिल हैं। हालांकि पाकिस्तान सबसे प्रदूषण देश में पहले पायदान पर हे।
सांसों में घुल रहा है 22 गुना ज्यादा जहर
आंकड़ों की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोनी में सूक्ष्म कणों (PM2.5) का वार्षिक औसत 112.5 दर्ज किया गया है। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 22 गुना से भी अधिक है। चिंताजनक बात यह है कि वर्ष 2024 की तुलना में यहाँ प्रदूषण के स्तर में 23% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है।
अवैध फैक्ट्रियों और कचरे ने बिगाड़ी आबोहवा
विशेषज्ञों के अनुसार, लोनी की इस बदहाली के पीछे आवासीय क्षेत्रों में चल रही अवैध औद्योगिक इकाइयाँ, अनियोजित विकास और बुनियादी ढांचे की कमी मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में खुले में कूड़ा जलाना और बिजली के तारों से तांबा निकालने के लिए उन्हें जलाना प्रदूषण को खतरनाक स्तर तक पहुँचा रहा है।
प्रशासन की बड़ी कार्रवाई: 17 फैक्ट्रियां सील
रिपोर्ट के सार्वजनिक होने और बढ़ते जन-आक्रोश के बीच स्थानीय प्रशासन अब एक्शन मोड में है। जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रदूषण फैलाने वाली 17 अवैध फैक्ट्रियों को सील ही में सील कर दिया गया है। साथ ही, इन इकाइयों के बिजली कनेक्शन भी काट दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अनियोजित औद्योगिक गतिविधियों और अवैध निर्माण पर लगातार नजर रखी जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सांसों में घुल रहा है 22 गुना ज्यादा जहर
आंकड़ों की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोनी में सूक्ष्म कणों (PM2.5) का वार्षिक औसत 112.5 दर्ज किया गया है। यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से 22 गुना से भी अधिक है। चिंताजनक बात यह है कि वर्ष 2024 की तुलना में यहाँ प्रदूषण के स्तर में 23% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है।
अवैध फैक्ट्रियों और कचरे ने बिगाड़ी आबोहवा
विशेषज्ञों के अनुसार, लोनी की इस बदहाली के पीछे आवासीय क्षेत्रों में चल रही अवैध औद्योगिक इकाइयाँ, अनियोजित विकास और बुनियादी ढांचे की कमी मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, क्षेत्र में खुले में कूड़ा जलाना और बिजली के तारों से तांबा निकालने के लिए उन्हें जलाना प्रदूषण को खतरनाक स्तर तक पहुँचा रहा है।
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