
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। जनपद के औद्योगिक जगत में आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई के बाद अब स्टेट जीएसटी विभाग ने भी मोर्चा खोल दिया है। बिंदल ग्रुप सहित अन्य प्रमुख औद्योगिक घरानों पर हुई छापेमारी में मिली करोड़ों की हेराफेरी के बाद अब जीएसटी विभाग इन उद्यमियों की कुंडली खंगालने की तैयारी में है। विभाग का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि आयकर चोरी के साथ-साथ क्या जीएसटी में भी बोगस बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का खेल हुआ है।


पेपर और लोहा उद्योग पर विशेष नजर

जीएसटी कमिश्नर नितिन बंसल द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिए गए निर्देशों के बाद स्थानीय स्तर पर सक्रियता बढ़ गई है। विभाग का मानना है कि आयकर छापेमारी में जो विसंगतियां (करीब 20 करोड़ के जेवर और 3 करोड़ की नकदी) सामने आई हैं, उनका सीधा संबंध कच्चे-पक्के के कारोबार और जीएसटी की चोरी से हो सकता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जांच की सबसे अधिक आंच पेपर मिल और लोहा उद्योग पर पड़ने की संभावना है।
आयकर विभाग से साझा होगा डेटा
स्टेट जीएसटी विभाग के संयुक्त आयुक्त (प्रशासन) राजनाथ तिवारी ने स्पष्ट किया है कि सेक्टर प्रभारियों को पिछले एक वर्ष की सेक्टर रिपोर्ट और औद्योगिक इकाइयों की विस्तृत सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग आयकर विभाग के अधिकारियों से संपर्क साधकर वहां से मिले दस्तावेजों और डिजिटल डेटा को साझा करेगा। इसके आधार पर जीएसटी विभाग अपनी टैक्स देनदारी की गणना करेगा।
एसआइबी (SIB) विंग हुई सक्रिय
इस पूरी कार्रवाई में एसआइबी विंग को भी विशेष जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बड़े औद्योगिक समूह जो टर्नओवर तो करोड़ों में दिखा रहे हैं, लेकिन टैक्स जमा करने में कोताही बरत रहे हैं, उन पर नकेल कसी जाए। इस हलचल से शहर के प्रमुख उद्यमियों और व्यापारियों में भारी बेचैनी देखी जा रही है। हाल ही में कमिश्नर नितिन बंसल ने पूरे प्रदेश में भी दिन-रात मोबाइल टीमों से माल वाहनों की जांच कराई है।










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