
एसएसपी आवास और बस अड्डे के पास लगे फ्लेक्स: सीसीटीवी में दिखे दो संदिग्ध और रहस्यमयी बस
इस मामले में अब तक 4 पुलिसकर्मी निलंबित हुए, विपक्ष के सपा-कांग्रेस हमलावर
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: वर्ष 2013 के भीषण मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर शहर के सबसे व्यस्त मार्गों, एसएसपी आवास और रोडवेज बस अड्डे के पास रातों-रात लगाए गए विवादित होर्डिंग्स ने पूरे उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में उबाल ला दिया है। ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ के नारों, पुरानी अखबारी कटिंग्स और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की विवादित तस्वीरों वाले इन पोस्टरों ने पुराने जख्मों को फिर ताजा कर दिया है। मिनटों में अपराधियों को ढूंढ निकालने का दावा करने वाली मुजफ्फरनगर पुलिस घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपियों तक पहुँचने में नाकाम साबित हो रही है।


सीसीटीवी में दिखे संदिग्ध, ‘गायब’ हुई रोडवेज बस
मामले की पड़ताल कर रही पुलिस की दो टीमों के हाथ अब तक पूरी तरह खाली हैं। सीसीटीवी फुटेज में दो संदिग्ध व्यक्ति अपने कंधों पर फ्लेक्स ले जाते दिखाई दिए हैं, जो पोस्टर लगाने के तुरंत बाद गायब हो गए। शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी रोडवेज जैसी दिख रही एक बस में सवार होकर आए थे और घटना को अंजाम देकर उसी बस से फरार हो गए। हालांकि, फुटेज में बस का रजिस्ट्रेशन नंबर स्पष्ट न होने से पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उधर, मुजफ्फरनगर डिपो के एआरएम प्रभात कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि उनके डिपो की बसें रात 11:30 बजे तक वापस आ जाती हैं और संदिग्ध बस उनके डिपो की नहीं है। पुलिस को अंदेशा है कि यह किसी बाहरी डिपो की लंबी दूरी वाली बस हो सकती है। मुजफ्फरनगर के अलावा सहारनपुर और लखनऊ में भी एक जैसे फ्लेक्स लगाए जाने से किसी संगठित गिरोह की साजिश की संभावना जताई जा रही है।

चार पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज
घटना की रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक प्रकाश चौक, बस अड्डे और रेलवे स्टेशन क्षेत्र में गश्त और शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे पुलिसकर्मियों पर शासन ने कड़ी कार्रवाई की है। ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के आरोप में सिविल लाइन थाने के दरोगा पंकज कुमार, सिपाही महेंद्र, विवेक और विशाल को निलंबित कर दिया गया है।
गरमाई सियासत: सपा भड़की, मंत्री बोले-कानून का राज है
विवादित पोस्टरों में अखिलेश यादव को निशाना बनाए जाने के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा पर तीखा हमला बोला है। वहीं, कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि 2013 में कवाल कांड के आरोपियों को तत्कालीन सपा सरकार के इशारे पर छोड़े जाने के कारण ही दंगा भड़का था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार में कानून का राज है और पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। एएसपी सिद्धार्थ के. मिश्रा और एसपी सिटी अमृत जैन ने बताया कि शांति व्यवस्था बिगाड़ने की साजिश करने वालों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।










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