
अमन-चैन, सौहार्द और भाईचारे की मिसाल थीं कुल्लन देवी
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। शहर की जानी-पहचानी वरिष्ठ समाजसेविका और मानवीय सरोकारों से जुड़ीं कुल्लन देवी का निधन हो गया। उनके देहांत की खबर से मुजफ्फरनगर के सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। वह काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं, लेकिन गंभीर बीमारी के बावजूद उनका मन सदैव समाज की सेवा, अमन-चैन और भाईचारे को मजबूत करने में ही लगा रहा।


जनपद में अमन-चैन, सौहार्द और भाईचारे की मिसाल रही कुल्लन देवी के निधन पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। भले ही कुल्लन देवी आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अमन, सौहार्द और इंसानियत के लिए किए गए उनके कार्य हमेशा शहरवासियों के दिलों में जीवंत रहेंगे

सद्भावना और सौहार्द के कार्यक्रमों में रहती थीं सक्रिय
सद्भावना और सामाजिक सौहार्द के मंचों पर सक्रिय भागीदारी कुल्लन देवी की सबसे बड़ी पहचान थी। वह मानती थीं कि समाज की असली ताकत आपसी प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने में है। उन्होंने अपने मधुर व्यवहार और निस्वार्थ सेवा भावना से सर्वसमाज के बीच एक अमिट छाप छोड़ी। जब भी शहर में आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को बनाए रखने की बात आती, वह बिना किसी झिझक के सबसे आगे बढ़कर अपनी भूमिका निभाती थीं। उनके लिए इंसानियत किसी जाति, धर्म या वर्ग की सीमाओं में बंधी नहीं थी।
सामाजिक परंपरा की अपूरणीय क्षति
कुल्लन देवी के साथ लंबे समय से जुड़े रहे समाजसेवी गौहर सिद्दीकी ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जाने से शहर के सामाजिक जीवन में एक ऐसी शून्यता पैदा हुई है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। उनका निधन केवल उनके परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि यह मुजफ्फरनगर की उस गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक परंपरा की क्षति है, जो लोगों को एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होना सिखाती है।











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