
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली। संसद के उच्च सदन राज्यसभा ने मंगलवार को विपक्षी दलों के भारी शोर-शराबे और हंगामे के बीच ‘जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया। यह महत्वपूर्ण विधेयक गत 31 जुलाई को लोकसभा से पहले ही पारित हो चुका है। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और मंजूरी के बाद यह औपचारिक रूप से कानून का रूप ले लेगा।
इस संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य जन्म और मृत्यु के विलंबित (देरी से होने वाले) पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सख्त एवं सुरक्षित बनाना है, ताकि फर्जीवाड़े तथा रिकॉर्ड में हेरफेर की गुंजाइश खत्म की जा सके।
विपक्ष का हंगामे में कुछ सांसदों ने चर्चा में लिया हिस्सा
उच्च सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद दोपहर 02 बजे जब उपसभापति हरिवंश की अध्यक्षता में दोबारा कार्यवाही शुरू हुई, तो गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को विधेयक पर विचार का प्रस्ताव रखने को कहा गया। चर्चा की शुरुआत में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सदन में व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को स्वयं आकर बयान देना चाहिए। इसी मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस सांसद फूलो देवी नेताम, भाजपा सांसद दर्शना सिंह, बीजद सांसद डॉ. संत्रुप्त मिश्रा, एआईएडीएमके के डॉ. एम. थंबीदुरई, भाजपा के बिस्वजीत सिन्हा और शिवसेना के ज्योति नागनाथ वाघमारे सहित कई सांसदों ने हंगामे के बीच चर्चा में भाग लिया।
2 वर्ष से अधिक की देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश होगा अनिवार्य
विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने नए प्रावधानों की जानकारी दी:
2 वर्ष से अधिक विलंब: यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 2 वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए अब प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य होगा। यानी यह अधिकार अब कार्यपालिका से हटाकर न्यायपालिका को सौंप दिया गया है।
1 से 2 वर्ष की देरी: एक से दो वर्ष के विलंबित मामलों में मौजूदा व्यवस्था ही लागू रहेगी। इसमें संबंधित डीएम (DM), एसडीएम (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति पहले की तरह आवश्यक होगी।
पंजीकरण प्रणाली का डिजिटलीकरण और आंकड़े
गृह राज्य मंत्री ने बताया कि देश में लगभग 3.5 लाख पंजीकरण इकाइयां पूरी मुस्तैदी से काम कर रही हैं। डिजिटल तकनीक के समावेश से नागरिक सेवाएं अधिक सुलभ और पारदर्शी बनी हैं।
जन्म पंजीकरण दर: वर्ष 2014 में जो जन्म पंजीकरण 86.6 प्रतिशत था, वह 2024 तक बढ़कर 99 प्रतिशत से अधिक पहुंच चुका है।
मृत्यु पंजीकरण दर: इसी अवधि में मृत्यु पंजीकरण का आंकड़ा 72.5 प्रतिशत से सुधरकर 99.4 प्रतिशत हो गया है।
हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित हुआ बिल
विपक्ष के हंगामे के बीच जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 राज्यसभा से पारित कर दिया गया। नित्यानंद राय ने स्पष्ट किया कि कई बार निजी स्वार्थों के चलते फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का प्रयास किया जाता है। नए कानून से ऐसे संदिग्ध और फर्जी पंजीकरणों पर पूरी तरह अंकुश लगेगा। विधेयक पारित होने के उपरांत सदन की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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