
पनकी के सरायमीता इलाके में जर्जर मकान की कच्ची छत ढही
लोकपथ लाइव, कानपुर। दीपावली के त्योहार पर जहां घरों में खुशियां मनाने और रोशनी करने की तैयारियां चल रही थीं, वहीं कानपुर में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। पनकी थाना क्षेत्र के सरायमीता (पनकी पड़ाव) इलाके में रविवार सुबह एक जर्जर मकान की कच्ची छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय कोठरी में मौजूद एक ही परिवार के तीन सदस्य मलबे में दब गए। इनमें 28 वर्षीय महिला, उनकी 64 वर्षीय सास और महज 15 दिन का नवजात बेटा शामिल था। तीनों की मौत हो गई।


इस दर्दनाक हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और परिजनों ने तत्काल राहत-बचाव कार्य शुरू किया और मलबे में दबे तीनों को बाहर निकाला। उन्हें आनन-फानन में कल्याणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। दीपावली की सुबह हुए इस हादसे से परिवार में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

कच्ची कोठरी में बैठे थे मां और दादी, पास में था नवजात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पनकी पड़ाव के सरायमीता निवासी हर्षित शुक्ला स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में कार्यरत हैं। रविवार को दीपावली के दिन उनकी 28 वर्षीय पत्नी अंशिका और 64 वर्षीय मां विनोदिनी घर की एक कच्ची कोठरी में बैठी थीं। उनके पास ही 15 दिन का नवजात बेटा आरव भी मौजूद था। परिवार के लोग सामान्य रूप से कोठरी में बैठे हुए थे। इसी दौरान अचानक मकान की जर्जर कच्ची छत भरभराकर नीचे गिर पड़ी। छत गिरने से कोठरी में मौजूद तीनों लोग भारी मलबे के नीचे दब गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने या बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
तेज आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे पड़ोसी
छत गिरने की तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। घटनास्थल पर पहुंचने पर उन्हें मकान की कोठरी मलबे में तब्दील मिली। अंदर लोगों के दबे होने की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने बिना देर किए मलबा हटाना शुरू कर दिया। परिजनों और पड़ोसियों ने मिलकर काफी मशक्कत के बाद अंशिका, विनोदिनी और नवजात आरव को बाहर निकाला। तीनों की हालत गंभीर देखते हुए उन्हें तत्काल कल्याणपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। हालांकि, अस्पताल में चिकित्सकों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
15 दिन पहले घर में गूंजी थी किलकारी, अब छाया मातम
इस हादसे ने परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया है। महज 15 दिन पहले घर में नवजात बच्चे के जन्म से खुशियों का माहौल था। परिवार के लोग बच्चे के आने की खुशियां मना रहे थे, लेकिन दीपावली की सुबह हुए हादसे ने सबकुछ बदल दिया। एक ही हादसे में मां, दादी और नवजात की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस घर में त्योहार की तैयारियां होनी थीं, वहां चीख-पुकार और मातम का माहौल बन गया। आसपास के लोग भी घटना से स्तब्ध हैं।
जर्जर मकान की स्थिति की होगी पड़ताल
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हादसे की जानकारी जुटाई। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मकान की छत जर्जर और कच्ची थी, जिसके अचानक ढहने से यह हादसा हुआ। पुलिस की ओर से घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। मकान की स्थिति और छत गिरने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
जर्जर मकानों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
कानपुर में हुआ यह हादसा जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। बारिश और मौसम के बदलाव के साथ कमजोर छतों और पुराने निर्माणों के गिरने का खतरा बना रहता है। ऐसे मकानों में रहने वाले परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और भवनों की स्थिति का आकलन करने की जरूरत है। दीपावली जैसे खुशी के पर्व पर तीन लोगों की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। इस हादसे ने एक बार फिर याद दिलाया है कि पुराने और कमजोर मकानों की अनदेखी कभी-कभी बेहद दुखद परिणाम सामने ला सकती है।











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