
लोकपथ लाइव,गाजियाबाद: दिल्ली से सटे गाजियाबाद में सक्रिय एक अंतरराज्यीय जासूसी नेटवर्क के खिलाफ कौशांबी पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने इस गिरोह के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिसमें एक महिला और एक नाबालिग भी शामिल है। इस सनसनीखेज मामले में अब तक गिरफ्तार होने वाले आरोपियों की संख्या 18 तक पहुंच गई है। पकड़े गए आरोपी सीधे तौर पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के आकाओं के संपर्क में थे।


एसीपी इंदिरापुरम अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि ताजा कार्रवाई में मथुरा निवासी मीरा ठाकुर, मुख्य आरोपी नौशाद और वीडियो बनाने के आरोपी एक नाबालिग को पकड़ा गया है। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि इस नेटवर्क का जाल देश के कई राज्यों में फैला हुआ था और ये लोग व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए पाकिस्तानी एजेंटों से जुड़े हुए थे।

मुंबई पोर्ट की रेकी और पाकिस्तानी फंडिंग
जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गिरोह का सदस्य दुर्गेश, जो मुंबई पोर्ट पर ट्रक ड्राइवर था, वहां की संवेदनशील लोकेशन और वीडियो पाकिस्तान भेजता था। पाकिस्तानी आका सीधे दुर्गेश के खाते में पैसे भेजते थे, जिसे वह गिरोह के अन्य सदस्यों में बांटता था। पुलिस ने इनके पास से 9 मोबाइल और 10 सिम कार्ड बरामद किए हैं। ये लोग फर्जी आईडी पर सिम लेकर उसका ओटीपी पाकिस्तानी हैंडलर्स को देते थे, ताकि वे भारतीय नंबरों पर व्हाट्सएप चला सकें।
प्रमुख खुलासे: जासूसी का डिजिटल मॉडल
आरोपियों को देश भर में 50 से अधिक संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाने का लक्ष्य मिला था। गिरोह ने दिल्ली कैंट और पानीपत रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर सोलर आधारित कैमरे लगाए थे ताकि वे बिना बिजली के काम कर सकें। पाकिस्तानी आकाओं ने इन युवाओं और नाबालिगों को विशेष ऐप चलाने और जासूसी करने की ऑनलाइन ट्रेनिंग दी थी। गिरोह ऐसे लड़कों और नाबालिगों को निशाना बना रहा था जो मोबाइल, सीसीटीवी और कंप्यूटर की जानकारी रखते हों और जिन्हें पैसों की जरूरत हो।
फरार आरोपियों की तलाश तेज
एडिशनल सीपी राजकरण नैय्यर के मुताबिक, गिरोह का मुख्य सरगना सुहेल मलिक है। फिलहाल पुलिस बिहार निवासी नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर की तलाश कर रही है। पकड़े गए आरोपियों में मेरठ, बिहार और मुंबई के लोग शामिल हैं, जो देश की सुरक्षा में सेंध लगाने के लिए ‘डिजिटल जासूस’ के रूप में काम कर रहे थे। पुलिस अब इनके बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की गहराई से जांच कर रही है ताकि फंडिंग के पूरे रूट का पता लगाया जा सके।










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