
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के चर्चित शिक्षक धर्मेंद्र कुमार हत्याकांड में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषी पुलिस हेड कांस्टेबल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी कोर्ट ने अभियुक्त पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
घटना का विवरण: मामला 17 मार्च 2024 का है, जब एसएसपी आवास के समीप वाराणसी कमिश्नरेट में तैनात मुख्य आरक्षी चंद्र प्रकाश यादव (निवासी जनपद मऊ) ने मामूली विवाद के बाद शिक्षक धर्मेंद्र कुमार पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी सरकारी कार्बाइन से अंधाधुंध गोलियां चला दी थीं। इस हमले में शिक्षक की मौके पर ही मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद पुलिस महकमे और शिक्षा जगत में भारी आक्रोश व्याप्त था।
त्वरित जांच और प्रभावी पैरवी: थाना सिविल लाइन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के दो दिन भीतर 19 मार्च 2024 को अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस प्रशासन द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए गुणवत्तापूर्ण विवेचना की गई और महज दो महीने के भीतर 18 मई 2024 को न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दी गई।
न्यायालय का फैसला: अभियोजन पक्ष डीजीसी राजीव शर्मा, एडीजीसी प्रवेंद्र कुमार व नरेंद्र शर्मा द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी कोर्ट ने चंद्र प्रकाश यादव को गंभीर धाराओं के साथ एससी/एसटी एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोषी को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
शिक्षक की हत्या पर बोर्ड कापियों के मूल्याकंन का हुआ था बहिष्कार: शिक्षक की घटना से जनपद में रोष फैल गया था। उस वक्त चल रहे यूपी बोर्ड कापियों का मूल्याकंन भी प्रभावित हुआ था। सरकुलर रोड पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष अमित कुमार जैन व अन्य संगठनों ने मूल्याकंन का बहिष्कार करते हुए सड़क जाम की थी। तत्कालीन डीआईओएस धमेंद्र शर्मा ने शाम तक जाकर मामले को संभाला था। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से वार्ता कर आरोपी पर सख्त कार्रवाई के लिए शिक्षकों की तरफ से उस वक्त बात रखी थी।
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