
लोकपथ लाइव, गाजियाबाद। पेट्रोल और डीजल की खपत को कम करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए गाजियाबाद के जिलाधिकारी (DM) रविंद्र कुमार मांदड ने एक अनुकरणीय फैसला लिया है। डीएम ने घोषणा की है कि वह ईंधन की बचत के लिए अब खुद बिना सुरक्षा एस्कॉर्ट के केवल एक ही कार से सफर करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने जिले के अन्य तमाम प्रशासनिक अधिकारियों से भी ईंधन खपत कम करने के लिए इसी तरह के कदम उठाने की पुरजोर अपील की है। इसी बीच वें शुक्रवार को बाइक से कलेक्ट्रेट पहुंचे।
कर्मचारी की बाइक पर बैठकर पहुंचे कलेक्ट्रेट
शुक्रवार को जिलाधिकारी का एक बेहद सादगी भरा लेकिन चौंकाने वाला रूप देखने को मिला। डीएम रविंद्र कुमार मांदड राजनगर स्थित अपने सरकारी आवास से कलेक्ट्रेट दफ्तर जाने के लिए भारी-भरकम सरकारी लाव-लश्कर और गाड़ियों के काफिले के बजाय मोटरसाइकिल पर सवार होकर निकले। बाइक को कलेक्ट्रेट का एक कर्मचारी प्रशांत चला रहा था और जिलाधिकारी उसके पीछे बैठे हुए थे।
तारीफ भी मिली और सोशल मीडिया पर घिरे भी
जिलाधिकारी के बाइक से दफ्तर जाने का यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इससे एक तरफ जहां आम जनता और प्रबुद्ध वर्ग ईंधन बचाने की दिशा में डीएम की इस सादगी और पहल की दिल खोलकर सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इस सफर ने उन्हें नियमों को लेकर घेर लिया। दरअसल, बाइक चला रहे कर्मचारी प्रशांत ने यातायात नियमों का पालन करते हुए हेलमेट डीएम के कार्यालय तक लगाकर रखा, लेकिन पीछे बैठे जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड हेलमेट कलेक्ट्रेट में प्रवेश करने के बाद उतार दिया। इस कारण्व उनकी अंतिम वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोग ईंधन बचाने की तारीफ के साथ सड़क सुरक्षा के नियमों को लागू कराने की जिम्मेदारी संभालने वाले जिले के मुखिया की बिना हेलमेट वाली फोटो पर सवाल करने लगें है। डीएम गाजियाबाद ने जो संदेश दिया है। इसको लेकर अन्य जिले के अधिकारी भी सबक ले रहे हैं।
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