
जल्द पटरी पर आएगी नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की परियोजना
ओ.पी. पाल.
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में परिवहन इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। (मोदीपुरम) तक के सफलतापूर्वक दौड़ने के बाद अब केद्र सरकार ने दिल्ली-पानीपत-करनाल और दिल्ली-अलवर कॉरिडोर बनाने की तैयारी कर ली है। हरियाणा के औद्योगिक और शैक्षणिक बेल्ट के लिए यह फैसला गेम-चेंजर साबित होने वाला है।


नमो भारत परियोजना में गत 22 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सराय काले खां से मोदीपुरम (मेरठ) तक के पूरे 82 किमी लंबे कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद अब उत्तर और दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर ज़ोर है। मसलन दिल्ली-पानीपत-करनाल कॉरिडोर (उत्तर दिशा)में यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर नेशनल हाईवे-44 के समानांतर रुपये की लागत से 35,000 करोड़लगभग 136.3 किलोमीटर तक चलेगा। इसमें प्रमुख स्टेशन सराय काले खां, इंद्रप्रस्थ, कश्मीरी गेट, मुकुंदपुर, नरेला, कुंडली, सोनीपत, मुरथल, गन्नौर, समालखा, पानीपत और करनाल (मधुबन बाईपास) होंगे। वर्तमान में दिल्ली से करनाल जाने में सड़क मार्ग से 3-4 घंटे लगते हैं, लेकिन इस कॉरिडोर के बाद यह दूरी हाईस्पीड ट्रेन से 90 मिनट में पूरा हो जाएगी और दिल्ली से पानीपत मात्र 60 मिनट में पहुँचा जा सकेगा। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की इस परियोजना के लिए फरवरी 2026 में बिजली की लाइनों को शिफ्ट करने के टेंडर जारी हो चुके हैं। निर्माण कार्य जून-जुलाई 2026 तक ज़मीनी स्तर पर शुरू होने की संभावना है।

राजस्थान व हरियाणा को लगेंगे पंख
इसी परियोजना में दिल्ली-गुरुग्राम-एसएनबी-अलवर कॉरिडोर (दक्षिण-पश्चिम दिशा)यह दूसरा बड़ा रूट है, जो राजस्थान और हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे धारूहेड़ा, भिवाड़ी, नीमराना) को दिल्ली से 164-196 किलोमीटर तक जोड़ेगा। यह रूट सराय काले खां से शुरू होकर मुनीरका, एरोसिटी, गुरुग्राम, मानेसर, रेवाड़ी, शाहजहाँपुर-नीमराना-बहरोड़ (एसएनबी) होते हुए अलवर तक पहुंचेगा। विशेष रूप से यह रूट गुरुग्राम के कॉर्पोरेट हब और दिल्ली एयरपोर्ट (एरोसिटी) को सीधे हाई-स्पीड कनेक्टिविटी देगा। इसके निर्माण के पहले चरण में 37,000 करोड़ की लागत से दिल्ली से एसएनबी(106 किमी) तक शुरू होगा। कनेक्टिविटी का नया हब सराय काले खां होगा, जो अब एक मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब बन चुका है। यहाँ की सबसे बड़ी खासियत ‘इंटरऑपरेबिलिटी’ है, जहां तीनों कॉरिडोर (मेरठ, पानीपत, और अलवर) यहीं मिलेंगे। मसलन यात्रियों को एक कॉरिडोर से दूसरे कॉरिडोर की ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन बदलने की ज़रूरत नहीं होगी। यहाँ से दिल्ली मेट्रो (पिंक लाइन), भारतीय रेलवे (निजामुद्दीन स्टेशन) और ISBT बस अड्डा भी पैदल दूरी पर जुड़े हुए हैं।
कम होगा आबादी का दबाव
दिल्ली-एनसीआर में दिल्ली से मेरठ के बाद अब करनाल और अलवर तक चलाई जाने की तैयारी से ‘नमो भारत’ दिल्ली और आसपास के शहरों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी का सबब बनेगा। वहीं एक ‘ग्लोबल सिटी’इन हाई-स्पीड ट्रेनों के आने से दिल्ली के अंदर आबादी का दबाव कम होगा। लोग करनाल या अलवर जैसे शहरों में रहकर भी दिल्ली में रोज़ाना नौकरी या व्यापार कर सकेंगे। प्रदूषण में कमी और ईंधन की बचत इस प्रोजेक्ट के सबसे बड़े पर्यावरणीय लाभ होंगे।










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