
पोक्सो एक्ट और बाल अधिकारों की जानकारी से जागरूक होंगे विद्यार्थी
बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में चलेंगे विशेष जागरूकता कार्यक्रम
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। बच्चों को यौन अपराधों, शोषण और उत्पीड़न से बचाने के साथ उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए जिले में सुरक्षित बचपन अभियान के दूसरे चरण को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल पर जनपद के बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए सबसे पहले शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे विद्यार्थियों को बाल सुरक्षा और उनसे जुड़े कानूनी अधिकारों की सही जानकारी दे सकें।


अभियान के तहत बच्चों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act), 2012, बाल अधिकारों, सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श, बाल यौन शोषण से बचाव, बाल विवाह और बाल श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों को इतना जागरूक बनाना है कि वे किसी भी प्रकार के शोषण या उत्पीड़न की स्थिति में बिना डर अपनी बात रख सकें और समय पर सहायता प्राप्त कर सकें।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने शुरू की पहल
सुरक्षित बचपन अभियान के द्वितीय चरण के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इनके अनुपालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुजफ्फरनगर के सचिव एवं अपर जिला जज (सीनियर डिवीजन) डॉ. सत्येंद्र कुमार चौधरी ने जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र भेजकर अभियान को विद्यालय स्तर पर संचालित कराने के निर्देश दिए। इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. सत्येंद्र कुमार चौधरी की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जिला नोडल अधिकारी डॉ. रणवीर सिंह ने प्रतिभाग किया। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के प्रतिनिधि के रूप में जिला समन्वयक शामिल हुए। बैठक में अभियान के उद्देश्यों, विद्यालयों में इसके प्रभावी संचालन और विद्यार्थियों को बाल संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी उपलब्ध कराने पर विस्तार से चर्चा की गई।
शिक्षकों को एक दिवसीय प्रशिक्षण, फिर स्कूलों में होंगे कार्यक्रम
अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए आगामी दिनों में जनपद स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इसमें बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला नोडल अधिकारी डॉ. रणवीर सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों को बाल सुरक्षा, POCSO एक्ट, बाल अधिकारों और बच्चों के संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। उन्हें यह भी बताया जाएगा कि बच्चों को उनकी उम्र और समझ के अनुरूप संवेदनशील विषयों की जानकारी किस तरह दी जाए। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल कानून की जानकारी देना नहीं, बल्कि शिक्षकों को इस योग्य बनाना भी है कि वे बच्चों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता विकसित कर सकें। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जिले के सभी विद्यालयों में नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श की दी जाएगी जानकारी
सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विद्यार्थियों को सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर समझाया जाएगा। बच्चों को बताया जाएगा कि यदि कोई व्यक्ति उनके साथ गलत व्यवहार करता है या उन्हें असहज महसूस कराता है तो वे चुप रहने के बजाय किसी भरोसेमंद व्यक्ति, शिक्षक या अभिभावक को इसकी जानकारी दें। इसके साथ ही बच्चों को बाल यौन शोषण से बचाव, अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा और किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में सहायता मांगने के तरीकों के बारे में जागरूक किया जाएगा। पोक्सो एक्ट के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बच्चों को बताया जाएगा कि कानून उन्हें यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। किसी भी प्रकार के शोषण की स्थिति में उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उन्हें कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
बाल विवाह और बाल श्रम के खिलाफ भी जागरूकता
अभियान का दायरा केवल यौन अपराधों से सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत विद्यार्थियों को बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी जागरूक किया जाएगा। बच्चों को उनके शिक्षा के अधिकार, सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार और सुरक्षित वातावरण में विकसित होने के अधिकार के बारे में बताया जाएगा। उन्हें समझाया जाएगा कि बाल विवाह और बाल श्रम बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक विकास को प्रभावित करते हैं। विद्यालयों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को यह जानकारी भी दी जाएगी कि किसी भी प्रकार की समस्या आने पर वे कहां और किससे मदद मांग सकते हैं।
विद्यालयों में भयमुक्त वातावरण बनाना शिक्षकों की जिम्मेदारी
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि विद्यालय केवल पढ़ाई कराने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व विकास, सुरक्षा और अधिकारों के संरक्षण के महत्वपूर्ण संस्थान भी हैं। प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यालयों में ऐसा वातावरण तैयार करें, जहां प्रत्येक विद्यार्थी स्वयं को सुरक्षित महसूस करे। बच्चे बिना किसी भय या संकोच के अपनी समस्या शिक्षकों के सामने रख सकें। यदि किसी बच्चे के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई देता है या वह किसी परेशानी में नजर आता है तो उसकी स्थिति को संवेदनशीलता से समझना भी जरूरी है।
सुरक्षित बचपन से बनेगा सशक्त समाज
सुरक्षित बचपन अभियान का मूल उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को उसके अधिकारों, सुरक्षा संबंधी कानूनी प्रावधानों और सहायता प्राप्त करने के तरीकों से परिचित कराना है। अभियान के माध्यम से विद्यालयों, परिवारों और समाज में बाल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। बैठक में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि बच्चों का सुरक्षित बचपन केवल कानून और प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि विद्यालय, परिवार और समाज की भी सामूहिक जवाबदेही है। बच्चों को सुरक्षित वातावरण, उचित मार्गदर्शन और अपने अधिकारों की जानकारी देकर ही एक संवेदनशील और सशक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है।











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