
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज में संचालित मेडिकल स्टोर पर अत्यधिक दामों में दवाइयां बेचने और चुनिंदा कंपनियों के साल्ट लिखकर मरीजों को बाध्य करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले को लेकर मंगलवार को स्थानीय निवासियों और दवा व्यापारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया और डीएम को एक मांग पत्र सौंपा। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ड्रग इंस्पेक्टर (DI) विमल देशबंधु को निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार को ‘एक सोच-किसान के अधिकारों की, एक सोच कृषि में बदलाव की’ संगठन के बैनर तले स्थानीय लोग और दवा व्यापारी कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज परिसर के भीतर संचालित मेडिकल स्टोर पर बाहर के बाजारों की तुलना में अत्यधिक ऊंचे दामों पर दवाइयां बेची जा रही हैं।
प्रदर्शनकारियों ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक पर्चे पर जानबूझकर वही विशिष्ट साल्ट या ब्रांड लिखते हैं, जो केवल परिसर के अंदर मौजूद मेडिकल स्टोर पर ही उपलब्ध होते हैं। इससे बाहर के बाजारों से दवा लेना असंभव हो जाता है और गरीब व आम मरीजों को आर्थिक मानसिक शोषण का सामना करना पड़ रहा है। प्रदर्शन और शिकायत करने वालों में मुख्य रूप से सतीश भारद्वाज, विनीत त्यागी, प्रवेश शर्मा सहित कई अन्य दवा व्यापारी व स्थानीय लोग मौजूद रहे।
अस्पताल प्रशासन ने दी सफाई: दूसरी ओर, आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. कृति गोस्वामी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि परिसर के अंदर स्थित मेडिकल स्टोर पर सभी दवाइयां उचित बिल और पक्के बिलिंग सिस्टम के साथ बेची जाती हैं, यही वजह है कि कुछ लोग इन्हें महंगा बता रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मरीज को किसी खास ब्रांड या कंपनी की दवा खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाता है और लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं।
Post Views: 75












Total views : 447597