
खतौली में वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन में आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ था केस
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। विधानसभा चुनाव 2017 के दौरान खतौली क्षेत्र में आयोजित एक चुनावी जनसभा में दर्ज आचार संहिता उल्लंघन और समर्थकों को प्रलोभन देने के नौ साल पुराने मामले में अदालत का बड़ा फैसला आया है। मुजफ्फरनगर की अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) एवं विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार फौजदार ने साक्ष्य के अभाव में बिजनौर से राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के वर्तमान सांसद चंदन चौहान समेत सात आरोपियों को सर्वसम्मति से दोषमुक्त (बरी) करार दिया है।


क्या था नौ साल पुराना पूरा मामला?
यह मामला 5 जनवरी 2017 का है, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी। उस समय चंदन चौहान समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रत्याशी के तौर पर खतौली विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में थे। पुलिस के अनुसार, 5 जनवरी 2017 को खतौली स्थित तान्या फार्म हाउस में एक चुनावी सभा का आयोजन किया गया था। तत्कालीन उपनिरीक्षक विक्रम सिंह भाटी ने खतौली कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि प्रत्याशी चंदन चौहान दोपहर करीब 2:00 बजे अपने दर्जनों समर्थकों के साथ गाड़ियों, ट्रैक्टरों और बसों में सपा का झंडा लगाकर, नारेबाजी करते हुए और लाउडस्पीकर बजाते हुए आयोजन स्थल पर पहुंचे। पुलिस ने आरोप लगाया था कि सभा और लाउडस्पीकर के प्रयोग की कोई प्रशासनिक अनुमति नहीं दिखाई गई। सड़क के दोनों ओर बेतरतीब वाहन खड़े करने के कारण मुख्य मार्ग पर भारी जाम लग गया। इसके अलावा समर्थकों को प्रलोभन देने के उद्देश्य से बिना अनुमति भोजन कराने का भी आरोप लगा था।

पुलिस ने 8 लोगों के खिलाफ दाखिल किया था आरोप पत्र
जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने चंदन चौहान, मयंक, जावेद, हाजी हबीबुर्रहमान, अख्तर, वसीम, हाजी शमशुद्दीन और सुलेमान परदेशी के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए कुल 8 गवाह अदालत में पेश किए गए थे। कानूनी प्रक्रिया और ट्रायल के दौरान आठवें आरोपी सुलेमान परदेशी का निधन हो गया था, जिसके बाद उनके खिलाफ केस समाप्त कर दिया गया था।
बचाव पक्ष की दलील और कोर्ट का अंतिम फैसला
शुक्रवार को मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान बिजनौर सांसद चंदन चौहान स्वयं कोर्ट में उपस्थित हुए। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल जिंदल ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित थे। अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस साक्ष्य या दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिससे यह सिद्ध हो सके कि सभा बिना अनुमति के की गई थी या समर्थकों को प्रलोभन दिया गया था। दोनों पक्षों की बहस और गवाहों के बयानों का अनुशीलन करने के बाद, पीठासीन अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार फौजदार ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद नहीं हैं। अदालत ने संशय का लाभ देते हुए सांसद चंदन चौहान समेत सभी सात जीवित आरोपियों को बरी कर दिया। फैसला आते ही कोर्ट परिसर के बाहर समर्थकों ने खुशी जताई।











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