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क्राफ्ट पेपर के दाम 30% बढ़ने और किल्लत से उद्यमी परेशान

लोकपथ लाइव, नई दिल्ली/ मुजफ्फरनगर: क्राफ़्ट पेपर की लगातार आसमान छूती कीमतों और बाज़ार में इसकी घटती आपूर्ति ने देश के पेपर कोन, कोरुगेटेड बॉक्स और संपूर्ण पैकेजिंग उद्योग को गंभीर संकट में धकेल दिया है। बीते महज दो महीनों के भीतर क्राफ़्ट पेपर के दामों में 25 से 30 प्रतिशत तक का भारी उछाल दर्ज किया गया है, जबकि मांग के मुकाबले इसकी उपलब्धता न के बराबर रह गई है। इस अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि और कच्चे माल की किल्लत के कारण उत्पादन लागत कई गुना बढ़ गई है, जिससे देश भर की छोटी-बड़ी विनिर्माण इकाइयां बंदी के कगार पर पहुंच गई हैं। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (IIA) की पहल के बाद इस ज्वलंत मुद्दे पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया तेज हो गई है।
 मुजफ्फरनगर आईआईए के चैयरमैन पवन गोयल ने बताया कि  इसी क्रम में देश भर के पेपर कोन और पैकेजिंग निर्माताओं की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक नई दिल्ली स्थित एक प्रतिष्ठित होटल में आयोजित की गई। इस राष्ट्रीय बैठक की अध्यक्षता सुभाष चंद्र अग्रवाल ने की, जबकि मंच का संचालन अशोक छारिया एवं पवन शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस बैठक में मुजफ्फरनगर, हापुड़, भीलवाड़ा, इंदौर, अहमदाबाद, चंडीगढ़ और लुधियाना सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रमुख उद्यमियों ने भाग लिया।
 बैठक में उद्यमियों ने एक स्वर में कहा कि यदि क्राफ़्ट पेपर की नियमित आपूर्ति बहाल नहीं हुई और बिक्री मूल्यों में सुधार नहीं किया गया, तो कारखानों का संचालन पूरी तरह ठप हो जाएगा। वक्ताओं ने ध्यान दिलाया कि यह संकट केवल पेपर कोन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर कोरुगेटेड बॉक्स और पूरे पैकेजिंग सेक्टर पर पड़ रहा है। चूंकि पेपर कोन सीधे तौर पर टेक्सटाइल और स्पिनिंग मिलों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी आपूर्ति बाधित होने से धागा मिलों का उत्पादन चक्र प्रभावित होगा, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार और सरकार के जीएसटी (GST) राजस्व को भारी नुकसान पहुंचेगा।
संकट से निपटने के लिए उद्योगपतियों ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि जब तक घरेलू बाजार की जरूरतें पूरी न हों, तब तक क्राफ़्ट पेपर के निर्यात पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए। साथ ही उद्यमियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार और संबंधित पक्ष जल्द ही इस समस्या का ठोस समाधान नहीं निकालते हैं, तो मजबूरी में देश भर की फैक्ट्रियों को एक सप्ताह तक बंद रखने जैसा कठोर कदम उठाना पड़ेगा।
इस अवसर पर मुकेश गुप्ता, आदित्य राज मोदी, अशोक खंडेलवाल, मयूर पासवाला, कुलदीप गर्ग, उमेश शाह, सुधीर गुप्ता, पवन कुमार गोयल, के.के. अग्रवाल और जय कुमार सहित कई प्रमुख उद्योगपति उपस्थित रहे।

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