
84 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस: दिल्ली कैंट और सरस्वती विहार में भड़काऊ हिंसा के थे दोषी
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: 1984 के सिख विरोधी दंगों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व वरिष्ठ नेता और तीन बार के सांसद सज्जन कुमार का निधन हो गया है। वे 84 वर्ष के थे और पिछले 7 वर्षों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में अपनी सजा काट रहे थे। जेल में स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें तुरंत दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल उनके निधन के सटीक कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं हो सका है और विस्तृत विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है।


31 अक्टूबर और 1 नवंबर 1984 की हिंसा में रही मुख्य भूमिका
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली के सुल्तानपुरी, दिल्ली कैंट, पालम कॉलोनी और सरस्वती विहार जैसे इलाकों में भड़की हिंसा में सज्जन कुमार का नाम मुख्य आरोपियों के रूप में सामने आया था।
दिल्ली कैंट कांड: 31 अक्टूबर 1984 को दिल्ली कैंट के राजनगर इलाके में भीड़ को उकसाने के बाद पांच सिखों—केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुवेंद्र सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी।
सरस्वती विहार मामला: 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार क्षेत्र में भीड़ को भड़काकर सिखों के घरों-दुकानों में आगजनी और लूटपाट कराई गई, जिसमें जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह को जिंदा जलाकर मार दिया गया था।
गवाहों और पीड़ितों (जिनमें मुख्य गवाह जगदीश कौर, निरप्रीत कौर और चम कौर शामिल थीं) के बयानों के अनुसार, सज्जन कुमार ने व्यक्तिगत रूप से सिखों के घरों की पहचान कराकर भीड़ को ‘सरदारों को मार दो’ जैसे नारों के साथ उकसाया था।

नानावटी आयोग, सीबीआई जांच और 2018 में उम्रकैद की सजा
सज्जन कुमार के खिलाफ मामलों का कानूनी घटनाक्रम काफी लंबा और उतार-चढ़ाव भरा रहा:
2005 (CBI जांच): जस्टिस जी.टी. नानावटी आयोग की सिफारिशों के आधार पर सीबीआई ने नए सिरे से मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
2013 (निचली अदालत से बरी): कड़कड़डूमा कोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए उन्हें बरी कर दिया, जिसके बाद पीड़ितों और सीबीआई ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया।
17 दिसंबर 2018 (हाई कोर्ट का फैसला): दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए सज्जन कुमार को हिंसा भड़काने और आपराधिक साजिश का दोषी माना और उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई।
कांग्रेस से इस्तीफा व सुप्रीम कोर्ट से झटका: हाई कोर्ट के फैसले के अगले ही दिन उन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी पुनर्विचार और जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
चाय-बेकरी से दिल्ली की राजनीति का बड़ा चेहरा बनने तक का सफर
23 सितंबर 1945 को जन्मे सज्जन कुमार ने अपनी शुरुआत बेहद साधारण स्तर से की थी। राजनीति में आने से पहले वे एक बेकरी चलाते थे।
1977: दिल्ली नगर निगम (MCD) के पार्षद बनकर अपने सियासी सफर की शुरुआत की।
1980: बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से पहली बार संसद पहुँचे। वे संजय गांधी के करीबी माने जाते थे।
1991 और 2004: दोबारा सांसद चुने गए। साल 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने रिकॉर्ड 8.5 लाख से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की थी।











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