
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: जिला महिला अस्पताल में कार्यरत एनएचएम (NHM) पैथोलॉजिस्टों की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अस्पताल की लैब से गर्भवती महिलाओं को गलत जांच रिपोर्ट देकर बेवजह मेरठ रेफर किए जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। मात्र एक घंटे के अंतराल में आई दो अलग-अलग जांच रिपोर्टों ने जिला महिला अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और पैथोलॉजी लैब के काम करने के तरीके पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला शहर की आवास विकास कॉलोनी का है, जहाँ रहने वाले अमित कुमार की 29 वर्षीय पत्नी पिंकी का इलाज जिला महिला अस्पताल में चल रहा था। उनकी प्रसव तिथि 24 जुलाई 2026 निर्धारित थी। प्रसव से ठीक पहले जिला अस्पताल की लैब में कराई गई ब्लड रिपोर्ट में पिंकी के प्लेटलेट्स मात्र 82 हजार दर्शाए गए।
अस्पताल की स्टाफ नर्स ने स्थिति को गंभीर बताते हुए बिना डॉक्टर की सलाह के मरीज को तुरंत मेरठ रेफर कर दिया। इस आपात स्थिति से घबराए पति अमित ने जोखिम न लेते हुए अपनी पत्नी को शहर के सर्कुलर रोड स्थित एक निजी निर्वाल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां रिपोर्ट सामान्य आने पर कुछ घंटे में ही महिला ने स्वास्थ्य बच्चे का जन्म दिया। पीड़िता ने दोनों रिपोर्ट लोकपथ लाइव को सौंपी है।
निजी लैब की जांच में खुली पोल
निजी अस्पताल में भर्ती होने के बाद मात्र एक घंटे के भीतर दोबारा खून की जांच कराई गई। इस रिपोर्ट ने सरकारी अस्पताल के दावों की पोल खोल दी। निजी लैब की रिपोर्ट में पिंकी के प्लेटलेट्स 1 लाख 30 हजार पाए गए, जो पूरी तरह सुरक्षित श्रेणी में थे। इसके बाद निजी अस्पताल में ही महिला का सफल और सुरक्षित प्रसव कराया गया, और अब जच्चा-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
आर्थिक और मानसिक शोषण का आरोप
पीड़ित पति अमित कुमार का कहना है कि सरकारी लैब की इस गंभीर लापरवाही के कारण उन्हें न केवल भारी मानसिक तनाव झेलना पड़ा, बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। यदि वे समय रहते निजी अस्पताल का रुख न करते, तो जल्दबाजी में मेरठ ले जाते समय बड़ा हादसा भी हो सकता था। उन्होंने इस मामले की उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है।
अस्पताल प्रशासन की सफाई
इस पूरे मामले पर जिला महिला अस्पताल के सीएमएस (CMS) डॉ. मुरली भास्कर का कहना है कि, “अस्पताल के पैथोलॉजिस्ट जो रिपोर्ट बनाकर चिकित्सक को देते हैं, डॉक्टर उसी के आधार पर काम करते हैं। पैथोलॉजी में तैनात डॉ. फैसल एनएचएम के तहत कार्य कर रहे हैं। यदि स्तर पर कोई कमी पाई जाती है, तो उसकी जांच कराई जाएगी। मशीनों की समय-समय पर जांच होती रहती है, लेकिन रिपोर्ट में यदि कोई गंभीर कमी मिलती है, तो मरीज की सुरक्षा को देखते हुए कोई चिकित्सक रिस्क नहीं ले सकता।“
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