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अमेरिकी एयरस्ट्राइक से दहला ईरान, कुवैत-बहरीन पर पलटवार, फिर हुई मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट

राष्ट्रपति ट्रंप की दोटूक चेतावनी- सुधरा नहीं ईरान तो हमेशा के लिए मिट जाएगा अस्तित्व
लोकपथ लाइव, दुबई। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में भू-राजनीतिक तनाव अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर अमेरिकी वायुसेना ने शनिवार को ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर दूसरे दौर की भीषण एयरस्ट्राइक की। अमेरिका की इस एकतरफा और बड़ी कार्रवाई से बौखलाए ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इस ताजा सैन्य टकराव के बाद दोनों पक्षों के बीच शांति स्थापित करने के लिए हुआ अंतरिम सीजफायर समझौता पूरी तरह टूटने की कगार पर आ गया है। विशेष रूप से कुवैत पर रविवार तड़के हुआ हमला, सीजफायर लागू होने के बाद से उस पर किया गया पहला प्रत्यक्ष हमला है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

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ट्रंप की ट्रुथ सोशल पर चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर खुद इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की और दुनिया को अमेरिकी रुख से अवगत कराया। ट्रंप ने साफ किया कि यह कड़ा कदम ईरान द्वारा लगातार किए जा रहे सीजफायर के उल्लंघनों के जवाब में उठाया गया है। बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दी कि एक वक्त ऐसा आ सकता है जब अमेरिका के लिए संयम रखना मुमकिन नहीं होगा और हम पूरी सैन्य ताकत से काम तमाम करने को मजबूर होंगे। अगर ऐसा हुआ, तो ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान’ का अस्तित्व हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

ड्रोन सेंटर और एयर डिफेंस मलबे में तब्दील
‘यूएस सेंट्रल कमांड’ द्वारा जारी बयान के अनुसार, फारस की खाड़ी में एक कमर्शियल शिप पर ईरानी हमले के तुरंत बाद अमेरिकी फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी। इस बदले की कार्रवाई में अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य निगरानी ढांचे, उन्नत संचार प्रणालियों (Communication Systems), हवाई रक्षा ठिकानों, ड्रोन स्टोरेज सेंटर्स और खाड़ी में बारूदी सुरंग (माइन्स) बिछाने वाली समुद्री इकाइयों को सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए सीधे निशाना बनाकर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।

‘किकू’ तेल टैंकर पर हमले से भड़का विवाद
इस ताजा सैन्य संकट की शुरुआत तब हुई जब फारस की खाड़ी में पनामा के झंडे वाले और कतर की सरकारी ऊर्जा कंपनी के कच्चे तेल से लदे टैंकर ‘किकू’ को निशाना बनाया गया। गौरतलब है कि कतर इस पूरे विवाद में अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा था, इसलिए इस टैंकर पर हमले को कूटनीतिक रूप से भी बड़ा झटका माना जा रहा है। इसके अतिरिक्त, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरानी खतरे को देखते हुए जहाजों की सुरक्षा के लिए ओमान के पास एक वैकल्पिक समुद्री मार्ग का विस्तार किया जा रहा है, जिससे ईरान बुरी तरह भड़का हुआ है।

कुवैत और बहरीन हाई अलर्ट पर 
ईरान के इस चौतरफा पलटवार के बाद खाड़ी देशों में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।

कुवैत में एयर डिफेंस सक्रिय: कुवैत की सेना, जहां अमेरिकी थल सेना का मुख्य बेस स्थित है, ने बताया कि रविवार तड़के उनके मुस्तैद एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से आ रहे कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर मार गिराया।
बहरीन ने की तीखी निंदा: बहरीन के विदेश मंत्रालय ने अपने भूभाग पर हुए ईरानी ड्रोन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए खुला खतरा बताया है। बता दें कि बहरीन में ही अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली ‘पांचवां बेड़ा’ (Fifth Fleet) तैनात है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड की हुंकार: दूसरी तरफ, ईरान के कट्टरपंथी अर्धसैनिक बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने एक बयान जारी कर दावों को उलट दिया है। ईरान का कहना है कि उन्होंने किसी नागरिक क्षेत्र पर नहीं, बल्कि क्षेत्र में अवैध रूप से मौजूद ‘अमेरिकी आतंकवादी सेना’ के ठिकानों पर सफलतापूर्वक हमला बोला है। इस तनाव के बाद वैश्विक तेल बाजारों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हड़कंप मच गया है, और आने वाले कुछ घंटे इस क्षेत्र का भविष्य तय करेंगे।

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