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लखनऊ अग्निकांड की एसआईटी जांच शुरु: चार अधिकारी सस्पेंड, 4 मुख्य आरोपी सलाखों के पीछे पहुंचे

सीएम योगी का ताबड़तोड एक्शन: लखनऊ विकास प्राधिकरण व बिजली के अन्य अधिकारी भी एसआईटी के रडार पर
लोकपथ लाइव, लखनऊ: राजधानी लखनऊ के भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाईलेवल बैठक के बाद पूरी तरह से एक्शन मोड में है। पहले दो सदस्यीय एसआईटी का गठन किया और उसकी जांच तत्काल प्रभाव से शुरु हो गई। नतीजन बिजली, फायर, एलडीए विभागों के लापरवाह चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इससे पहले सीएम ने घटनास्थल का न कि बारीकी से निरीक्षण किया, बल्कि किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमसी) जाकर घायलों की कुशल क्षेम भी ली। इसके बाद देर रात बुलाई गई एक हाईलेवल मीटिंग में मुख्यमंत्री ने बड़ी कार्रवाई करते हुए

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चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया और मामले की विस्तृत जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। मुख्यमंत्री ने अलीगढ से सीधे लखनऊ पहुंचे। इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रशासन के आला अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाने के निर्देश दे दिए थे। लखनऊ लैंड करते ही मुख्यमंत्री का काफिला सबसे पहले सीधे अलीगंज स्थित घटनास्थल पर पहुंचा। वहाँ उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुआवजे का ऐलान
घटनास्थल के बाद सीएम योगी सीधे किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहाँ उन्होंने डॉक्टरों की टीम से घायलों के इलाज की व्यवस्था की जानकारी ली और निर्देश दिया कि घायलों के उपचार में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी ने इस हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और उनके परिजनों को ₹5-5 लाख तथा गंभीर रूप से घायलों को ₹50-50 हजार की आर्थिक सहायता देने का तत्काल ऐलान किया। अस्पताल से लौटने के बाद मुख्यमंत्री आवास (5, कालिदास मार्ग) पर आधी रात को एक आपातकालीन उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई। इस बैठक में राज्य के तमाम वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

चार बड़े अधिकारी तत्काल सस्पेंड
मुख्यमंत्री के कड़े रुख को देखते हुए बैठक के तुरंत बाद लापरवाही बरतने वाले चार अधिकारियों को सस्पेंड करने का आदेश जारी कर दिया गया। इनमें गौरव कुमार– एक्सेन कलेक्शन (बिजली विभाग), जानकीपुरम, कमलेन्द्र कुमार सिंह– एफएसएसओ(फायर विभाग), प्रभारी, इंदिरा नगर, अनिल कुमार–सहायक अभियंता (AE) और प्रमोद पांडे–अवर अभियंता (JE), लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) शामिल हैं।

चार मुख्य आरोपी हुए गिरफ्तार
अभियुक्त हादसे के बाद लखनऊ पुलिस भी पूरी तरह मुस्तैद दिखी। थाना अलीगंज में मुकदमा अपराध संख्या 115/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 110, 105, 125, 3(5) और उत्तर प्रदेश अग्नि शमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत 6 नामजद और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अब तक 4 मुख्य आरोपियों को रामकृष्ण उपाध्याय (निवासी: सेक्टर D, अलीगंज, लखनऊ), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (उम्र: 62 वर्ष, निवासी: मदेयगंज, सीतापुर रोड, लखनऊ), तूशॉक कृष्णा जायसवाल (उम्र: 31 वर्ष, निवासी: बालागंज, थाना ठाकुरगंज, लखनऊ) और सुरेश कुमार साहू (निवासी: मड़ियांव, लखनऊ) को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले में अन्य दोषियों और अवैध निर्माण को शह देने वाले तत्वों के खिलाफ विधिक कार्रवाई तेजी से प्रचलित है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

अन्य बड़े अफसरों पर गिरेगी गाज
मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस टीम का नेतृत्व अमृत अभिजात (अपर मुख्य सचिव, पर्यटन, धर्मार्थ और संस्कृति विभाग) और प्रवीण कुमार (अपर पुलिस महानिदेशक, लखनऊ जोन) कर रहे हैं। SIT को मात्र 7 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस जांच के दायरे में एलडीए और नगर निगम के कई बड़े अधिकारी भी आ सकते हैं, जिनकी जवाबदेही तय होना निश्चित है।

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