
लोकपथ लाइव, गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर की जीवनदायिनी यमुना नदी में जहरीला केमिकल और कचरा बहाने वाली गाजियाबाद की 300 से अधिक फैक्ट्रियों पर अब परमानेंट ताला जड़ने जा रहा है। विद्युत निगम ने इन सभी दागी कर्नखानों की सूची उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) को सौंप दी है। इस महा-अभियान की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिला प्रशासन के साथ-साथ केंद्र सरकार भी इस पूरी कार्रवाई की सीधे मॉनिटरिंग कर रही है। शासन ने साफ चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने वाले विभागीय अधिकारियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक एक्शन लिया जाएगा।
दरअसल, लोनी, भोपुरा, शहीद नगर, राजेंद्र नगर और साहिबाबाद जैसे रिहायशी व औद्योगिक इलाकों में मानकों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध फैक्ट्रियां चलाई जा रही हैं, जिनमें से अधिकांश के पास यूपीपीसीबी की एनओसी तक नहीं है। इन कारखानों, खासकर कपड़ा रंगाई इकाइयों का केमिकल युक्त दूषित पानी साहिबाबाद नाले से होते हुए शाहदरा नाले के रास्ते सीधे यमुना नदी में जाकर गिर रहा है। हालांकि, इंदिरापुरम में करोड़ों की लागत से तीन बड़े एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लगाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद यमुना में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसने विभागीय दावों की पोल खोल दी है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, साहिबाबाद ड्रेन में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर मानक से छह गुना अधिक यानी 180 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया है, जो जलीय जीवन के लिए बेहद घातक है।
विद्युत निगम, जिला प्रशासन और यूपीपीसीबी की संयुक्त टीमें सबसे पहले बड़े कारखानों पर चाबुक चलाएंगी, जिसके बाद छोटे उद्योगों को सर्वे कर चिह्नित किया जाएगा। विभाग ने इस बार सांठगांठ कर दोबारा बिजली कनेक्शन जोड़ने वाले खेल पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है। दोबारा ऐसी शिकायत मिलने पर सीधे मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
यूपीपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि यमुना को प्रदूषित करने वाली फैक्ट्रियों की सूची विद्युत निगम से मिल गई है। विद्युत निगम, जिला प्रशासन व यूपीपीसीबी की टीम संयुक्त रूप से कार्रवाई शुरू कर दी है। इन सभी अवैध रूप से संचालित इकाइयों को जल्द ही पूरी तरह सील किया जाएगा।
Post Views: 47













Total views : 345834