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मुजफ्फरनगर के गुड़ को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान: जीआई टैग मिलने से वैश्विक बाजार में जमाएगा धाक

नकली उत्पादों से सुरक्षित होगी मिठास, उत्पादकों और व्यापारियों से की जीआई पंजीकरण कराने की अपील
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के प्रमुख कृषि प्रधान जनपद मुजफ्फरनगर के नाम आज एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो गई है। ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना के तहत चयनित और अपनी बेमिसाल शुद्धता के लिए देश भर में मशहूर मुजफ्फरनगर के गुड़ को अब आधिकारिक तौर पर ‘भौगोलिक संकेतक’ यानी जीआई टैग मिल गया है। इस प्रतिष्ठित वैश्विक मुहर के लगने के बाद अब मुजफ्फरनगर का गुड़ दुनिया भर के बाजारों में अपनी प्रामाणिकता, दानेदार बनावट और खास मिठास के साथ अलग छाप छोड़ेगा। यह मील का पत्थर न केवल इस उत्पाद की गुणवत्ता को प्रमाणित करता है, बल्कि स्थानीय गन्ना किसानों और गुड़ कारीगरों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के द्वार भी खोलेगा।

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नकली ब्रांडिंग पर लगेगी लगाम, उत्पादकों को मिलेगा एकाधिकार
जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र, मुजफ्फरनगर के उपायुक्त उद्योग ने बताया कि जीआई टैग मिलना किसी भी पारंपरिक उत्पाद के लिए उसकी भौगोलिक पहचान की कानूनी सुरक्षा की तरह है। इस उपलब्धि के बाद मुजफ्फरनगर का गुड़ पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगा। अब देश या विदेश के किसी भी कोने में अगर कोई विक्रेता अपने उत्पाद पर “मुजफ्फरनगर का गुड़” लिखकर बेचेगा, तो उसके लिए यह अनिवार्य होगा कि वह गुड़ मुजफ्फरनगर की मिट्टी में उगे गन्ने और यहाँ की पारंपरिक व शुद्ध विधि से ही तैयार किया गया हो। इससे क्षेत्र के वास्तविक उत्पादकों को सामूहिक रूप से उत्पादन और बिक्री का विशेष एकाधिकार प्राप्त हो गया है, जिससे नकली उत्पादों के बाजार पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

यूपी के 77 उत्पादों में शामिल, नाबार्ड का मिला सहयोग
विभाग के मुताबिक, नाबार्ड के विशेष सहयोग और प्रयासों से उत्तर प्रदेश के कुल 77 अद्वितीय उत्पादों को अब तक जीआई टैग की सूची में शामिल किया जा चुका है। मुजफ्फरनगर का गुड़ अब इस गौरवशाली सूची का हिस्सा बनकर जनपद की समृद्ध कृषि संस्कृति और सामूहिक बौद्धिक संपदा का चमकता हुआ सितारा बन गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस टैग के मिलने से खाड़ी देशों और यूरोपीय बाजारों में मुजफ्फरनगर के गुड़ की मांग कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे निर्यात की असीम संभावनाएं पैदा होंगी।

ब्रांडिंग और पैकेजिंग का मिलेगा लाभ
जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त के अनुसार जीआई टैग मिलने के बाद अब गुड़ की वैक्यूम पैकेजिंग, ब्रांडिंग और इसके निर्यात की संभावनाएं बहुत व्यापक हो गई हैं। सरकार और नाबार्ड की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से उत्पादकों को आधुनिक मशीनरी, पैकेजिंग प्रशिक्षण और बेहतर मार्केटिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे हमारे किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को सीधा संबल मिलेगा।

पंजीकरण के लिए उद्योग केंद्र में खुला विशेष डेस्क
ऐतिहासिक जीआई टैग मिलने के बाद जिला प्रशासन और उद्योग विभाग ने जनपद के सभी छोटे-बड़े गुड़ उत्पादकों, कोल्हू संचालकों और गुड़ व्यापारियों से बेहद महत्वपूर्ण अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि ब्रांडिंग और प्रीमियम मूल्य का लाभ उठाने के लिए सभी हितधारक जीआई टैग के तहत अपना पंजीकरण जल्द से जल्द सुनिश्चित करा लें। केवल पंजीकृत उत्पादक ही अपने पैकेट पर जीआई का आधिकारिक लोगो (Logo) और पहचान चिन्ह लगा सकेंगे, जिससे ग्राहकों को असली और नकली गुड़ की पहचान करने में आसानी होगी। पंजीकरण और इस प्रक्रिया से जुड़ी किसी भी तकनीकी जानकारी के लिए गुड़ उत्पादक किसी भी कार्यदिवस में जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र, औद्योगिक आस्थान सूजडू, मेरठ रोड, मुजफ्फरनगर में संपर्क कर सकते हैं। कार्यालय में मौजूद विशेषज्ञ अधिकारियों की टीम फॉर्म भरने से लेकर प्रमाणन की पूरी प्रक्रिया में उत्पादकों की निशुल्क मदद करेगी।

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