
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। जनपद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में तैनात जिम्मेदार स्वास्थ्य अधिकारियों की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। इमरजेंसी और जनसेवा जैसी संवेदनशील ड्यूटी में तैनात कई अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) व डिप्टी सीएमओ व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के बजाय शाम होते ही जिला मुख्यालय छोड़ देते हैं। सरकारी नियमों और सेवा नियमावली को ताक पर रखकर ये अधिकारी प्रतिदिन पड़ोसी जिले मेरठ से अपनी निजी कारों द्वारा अपडाउन कर रहे हैं।
इस मनमानी के कारण जहां सुबह के समय ये अधिकारी वक्त पर दफ्तर नहीं पहुंचते, वहीं शाम को पांच बजने से पहले ही अपनी गाड़ियां लेकर मेरठ की तरफ निकल जाते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरी आवाजाही के लिए जिलाधिकारी (डीएम) या सीएमओ से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली जा रही है, जो सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश सेवा नियमावली का खुला उल्लंघन है।
केवल दो अधिकारियों का मुख्यालय पर डेरा, बाकी सरकारी नियमों से बेपरवाह
उत्तर प्रदेश सेवा नियमावली के स्पष्ट निर्देश हैं कि जिले में तैनात कोई भी अधिकारी बिना जिलाधिकारी की अनुमति के जिला मुख्यालय नहीं छोड़ सकता। ड्यूटी के दौरान और उसके बाद भी उन्हें जिले की सीमा परिधि में ही रात्रि आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होती है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे मौके पर उपलब्ध रह सकें।
गौर करें तो स्वास्थ्य विभाग में तैनात केवल दो एसीएमओ ही जिला मुख्यालय पर किराए का आवास लेकर रह रहे हैं, जबकि अन्य सभी मेरठ से आवाजाही कर रहे हैं। मुख्यालय छोड़ने वाले इन स्वास्थ्य अधिकारियों में:
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डॉ. अशोक कुमार (चिकित्सालय पंजीकरण का जिम्मा)
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डॉ. लोकेश गुप्ता (जिला क्षय रोग अधिकारी – DTO)
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डॉ. विपिन कुमार (पीसीपीएनडीटी पटल प्रभारी)
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डॉ. अजय कुमार (झोलाछाप डॉक्टरों पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी)
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डॉ. विक्रांत (जिला सर्विलांस अधिकारी) शामिल हैं।
दफ्तर से नदारद अफसर, जिले में फैला झोलाछापों का जाल
जिम्मेदार अधिकारियों की इस गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली का सीधा असर जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। कार्रवाई करने वाले नोडल अधिकारी और प्रशासनिक अमला खुद पूरे समय दफ्तरों से नहीं होते, जिसके चलते मुजफ्फरनगर में अपंजीकृत डॉक्टरों और अवैध क्लीनिकों (झोलाछापों) का जाल लगातार फैलता जा रहा है। आम जनता को अपने जरूरी प्रशासनिक कार्यों और शिकायतों के लिए भटकना पड़ रहा है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत के लिए की गई देशव्यापी अपील का भी इन अधिकारियों पर कोई असर नहीं दिख रहा है, जो प्रतिदिन निजी गाड़ियों से लंबा सफर तय कर रहे हैं।
क्या कहते है जिम्मेदारी अधिकारी-
“जिले पर तैनात कोई भी एसीएमओ व डिप्टी सीएमओ मुख्यालय नहीं छोड़ सकते हैं, लेकिन इन सभी ने मेरठ में आवास बना रखे हैं, जिस कारण यह प्रतिदिन अपडाउन करते हैं। इस संबंध में सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर कड़ी चेतावनी दी जाएगी। ईंधन और समय की बचत के लिए इन्हें प्रयास करने की जरूरत है। इसी बचत को ध्यान में रखते हुए अब हम सभी स्वास्थ्य केंद्रों की समीक्षा बैठकें भी वेब (ऑनलाइन) माध्यम से कर रहे हैं।”
– डॉ. सुनील कुमार तेवतिया, सीएमओ, मुजफ्फरनगर
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