
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की पुलिस प्रशिक्षण की समीक्षा, क्षमता तीन गुना से ज्यादा बढ़ी
लोकपथ लाइव, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की पुलिसिंग को देश में सर्वश्रेष्ठ और जनविश्वास के मानकों पर खरा उतारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बदलते समय में पुलिस की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है। अब आधुनिक तकनीक, संवेदनशील व्यवहार, संवाद कौशल, साइबर अपराधों की गहरी समझ और फॉरेंसिक दक्षता ही प्रभावी पुलिसिंग की बुनियादी जरूरतें बन चुकी हैं।


लखनऊ में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशिक्षण को पूरी तरह परिणामोन्मुख, व्यावहारिक और तकनीक-आधारित बनाने की कार्ययोजना को मंजूरी दी। उन्होंने निर्देश दिए कि रोल-आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तेजी से विकसित किया जाए ताकि हर स्तर के पुलिसकर्मी अपनी भूमिका के अनुसार दक्ष हो सकें। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि राज्य में पुलिस प्रशिक्षण की क्षमता को 18 हजार से बढ़ाकर 60,244 कर दिया गया है। वर्तमान में मुरादाबाद पुलिस अकादमी सहित 11 स्थाई प्रशिक्षण संस्थान, 6 पुलिस ट्रेनिंग स्कूल और 112 रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर (RTC) पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहे हैं। डिजिटल लर्निंग के क्षेत्र में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत यूपी पुलिस ने देश में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। iGOT पोर्टल पर उत्तर प्रदेश के 3.90 लाख से अधिक पुलिसकर्मी पंजीकृत हैं, जो अब तक लगभग 59 लाख कोर्स पूरे कर चुके हैं। हाल ही में आयोजित ‘साधना सप्ताह’ (2 से 10 अप्रैल) में यूपी पुलिस ने देश के सभी राज्यों और केंद्रीय बलों को पछाड़कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इस दौरान रिकॉर्ड 2,45,645 पुलिसकर्मियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कोर्स भी सफलतापूर्वक पूरा किया।

बदलेगा रवैया: व्यवहार में दागी 5,816 पुलिसकर्मी चिन्हित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जोर देकर कहा कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार ही उनकी असली पहचान तय करता है। बैठक में बताया गया कि जनता से दुर्व्यवहार की शिकायत मिलने पर 5,816 पुलिसकर्मियों को चिन्हित किया गया है। इन सभी के लिए संवाद कौशल और सौम्य व्यवहार का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके लिए टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुम्बई की भी मदद ली गई है। प्रशिक्षण के बाद पुलिसकर्मियों के व्यवहार में कितना सुधार आया, इसे जांचने के लिए 18 प्रमुख बिंदुओं पर ‘इम्पैक्ट असेसमेंट’ (प्रभाव मूल्यांकन) व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें महिला सम्मान, तनाव प्रबंधन और आत्मनियंत्रण जैसे विषय शामिल हैं।
ड्रोन, साइबर लैब और सिम्युलेटर से लैस होंगे ट्रेनिंग सेंटर
भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए अब पुलिस प्रशिक्षण में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश किया जा रहा है। अब यूपी पुलिस के जवानों को ड्रोन उड़ाने का प्रशिक्षण, साइबर फॉरेंसिक लैब का संचालन, ड्राइविंग सिम्युलेटर और फायरिंग सिम्युलेटर जैसी आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके साथ ही, आगामी प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में वर्तमान परिप्रेक्ष्य के अनुसार बदलाव करते हुए 11 नए संवेदनशीलता मॉड्यूल जोड़े गए हैं। ATS, STF, NDRF और फायर सर्विसेज जैसी विशेषज्ञ एजेंसियां जवानों को विशेष ऑपरेशनल मॉक ड्रिल और कैप्सूल कोर्स कराएंगी।
मालदीव पुलिस को ट्रेनिंग देने की तैयारी
उत्तर प्रदेश पुलिस की बढ़ती दक्षता का असर अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखने लगा है। पहली बार उत्तर प्रदेश पुलिस अकादमी, मुरादाबाद में मालदीव पुलिस सेवा के उपनिरीक्षकों (Sub-Inspectors) को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव केंद्र सरकार के समक्ष विचाराधीन है। विदेश मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित इस प्रस्ताव को गृह मंत्रालय के माध्यम से भेजा गया है। मुख्यमंत्री ने इसे भारत और पड़ोसी देशों के बीच आंतरिक सुरक्षा सहयोग की दृष्टि से एक बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।












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