
बिना बिक्री बढ़ाए ‘सिस्टम करेक्शन मॉडल’ और जीरो-लीकेज नीति से हुआ चमत्कार
पिछले साल के अप्रैल के मुकाबले ₹931.54 करोड़ का बंपर उछाल
लोकपथ लाइव, लखनऊ: उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता, कड़े वित्तीय अनुशासन और तकनीक के बेहतरीन समावेश से आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत में ही राजस्व संग्रह के सभी पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। चालू वित्तीय वर्ष के पहले ही महीने यानी अप्रैल 2026 में विभाग को कुल 5,251 करोड़ रूपये का भारी-भरकम राजस्व प्राप्त हुआ है। यह आंकड़ा अप्रैल 2025 में मिले 4,319.46 करोड़ रूपये के मुकाबले 931.54 करोड़ ट(लगभग 21.5 प्रतिशत) अधिक है।


विभागीय जानकारों और उच्चाधिकारियों के अनुसार, यह अभूतपूर्व प्रगति शराब की खपत या बिक्री को प्रोत्साहित किए बिना हासिल की गई है, जो सीधे तौर पर राज्य सरकार के ‘सिस्टम करेक्शन मॉडल’ और जीरो-लीकेज नीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। आबकारी विभाग के पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो राज्य की वित्तीय सेहत में आया बदलाव साफ नजर आता है। साल 2011-12 में प्रदेश का आबकारी राजस्व महज 8,139 करोड़ रूपये था, जो साल 2016-17 तक आते-आते सिर्फ 14,273 करोड़ रूपये तक ही पहुंच सका था। उस दौर में मैन्युअल सिस्टम और मानवीय हस्तक्षेप के चलते राजस्व की भारी चोरी (रिसाव) और अवैध तस्करी चरम पर थी, जिसके कारण विभाग अपने तय लक्ष्य का केवल 74.15 प्रतिशत ही हासिल कर पा रहा था।

ई-गवर्नेंस और ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ तकनीक से टूटी तस्करों की कमर
साल 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद विभाग के पूरे ढांचे का कायाकल्प कर दिया गया। राजस्व के रिसाव को रोकने के लिए निम्नलिखित बड़े कदम उठाए गए। इसमें डिजिटल ई-टेंडरिंग के तहत दुकानों के आवंटन में पारदर्शिता लाने और सिंडिकेट राज को खत्म करने के लिए लाइसेंस प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और ई-टेंडरिंग आधारित बनाया गया। वहीं ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली में फैक्ट्रियों से लेकर दुकानों तक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) की रीयल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए बारकोड आधारित ‘ट्रैक एंड ट्रेस’ सिस्टम लागू किया गया। इसके अलावा अवैध शराब के निर्माण और बाहरी राज्यों से होने वाली तस्करी के खिलाफ लगातार कड़े दंडात्मक अभियान चलाए गए, जिससे राजस्व का नुकसान पूरी तरह बंद हो गया।
उत्तर प्रदेश आबकारी राजस्व की प्रगति यात्रा (एक नज़र में)
वित्तीय वर्ष कुल प्राप्त आबकारी राजस्व उपलब्धि
2011-12 8,139 करोड़ रूपये शुरुआती धीमी रफ्तार
2016-17 14,273 करोड़ रूपये लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 74.15% उपलब्धि (मैन्युअल सिस्टम)
2018-19 23,928 करोड़ रूपये पहली बार लक्ष्य से अधिक (104.03%) प्राप्ति
2021-22 36,321 करोड़ रूपये तकनीकी सुधारों और डिजिटल मॉनिटरिंग का असर शुरू
2024-25 52,573 करोड़ रूपये ऐतिहासिक ₹50 हजार करोड़ का जादुई पड़ाव पार
2025-26 57,722 करोड़ रूपये 2016-17 के मुकाबले करीब 4 गुना की भारी वृद्धि
डेटा आधारित मॉनिटरिंग का रोल मॉडल बना उत्तर प्रदेश
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का यह आबकारी मॉडल अब देश के अन्य राज्यों के लिए डेटा आधारित गवर्नेंस और वित्तीय अनुशासन का एक बेहतरीन नजीर बन चुका है। पहले जहां कागजी और मैन्युअल व्यवस्था के कारण भ्रष्टाचार की गुंजाइश बनी रहती थी, वहीं अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से गड़बड़ियों पर पूरी तरह विराम लग गया है। 2026-27 के शुरुआती महीने (अप्रैल) के यह धमाकेदार आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश वित्तीय आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में कई और नए कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है।











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