
ठेले के विवाद में बेटे को बचाने के लिए पुलिसकर्मियों से भिड़ गई मां
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: जनपद के नई मंडी कोतवाली क्षेत्र स्थित कूकड़ा पुलिस चौकी बुधवार को उस समय अखाड़ा बन गई, जब पुलिसिया कार्रवाई से नाराज कई पीड़ित परिवारों ने चौकी परिसर के भीतर ही मोर्चा खोल दिया। चाऊमीन के ठेले के विवाद से शुरू हुआ यह मामला देखते ही देखते पुलिस बनाम जनता के बड़े हंगामे में तब्दील हो गया। चौकी परिसर में रोती-बिलखती मां और पुलिसकर्मियों से तीखी बहस करते परिजनों के वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे इलाके में पुलिस की कार्यशैली को लेकर भारी आक्रोश है।


उधारी के पैसों और चाऊमीन ठेले से शुरू हुआ विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ऋतिक नाम का युवक कूकड़ा चौक पर सूरज जैन की दुकान के बाहर चाऊमीन का ठेला लगाता है। बताया जा रहा है कि ऋतिक पर सूरज जैन के करीब 6 हजार रुपये और पवन नाम के एक अन्य युवक के करीब 7 हजार रुपये उधार थे। पवन अपने एक साथी के साथ कूकड़ा चौक पहुंचा और ऋतिक से तुरंत पैसों की मांग करने लगा। ऋतिक ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए कुछ दिनों की मोहलत मांगी, लेकिन आरोप है कि पवन और उसके साथी ने जबरन उसका ठेला खींचकर ले जाने का प्रयास किया। जब ऋतिक ने अपनी रोजी-रोटी बचाने की कोशिश की, तो दबंगों ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी।

बीच-बचाव करने आई महिला से अभद्रता, डायल-112 पर दी सूचना
हंगामा और शोर-शराबा सुनकर दुकान मालिक सूरज जैन की पत्नी बीच-बचाव करने मौके पर पहुंचीं। आरोप है कि दबंगों ने उनके साथ भी धक्का-मुक्की की और अभद्रता की। इसके बाद पीड़ित ऋतिक ने तुरंत डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को मामले की जानकारी दी। मौके पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को पकड़कर कूकड़ा चौकी ले आई, लेकिन असली ड्रामा चौकी के भीतर शुरू हुआ। पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद कूकड़ा चौकी पुलिस ने असली आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा हम पर ही सख्ती दिखाना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब पुलिसकर्मियों ने ऋतिक को जबरन गाड़ी में ठूंसने का प्रयास किया, जिसे देख उसकी मां अपने बेटे को बचाने के लिए पुलिस से भिड़ गई।
13 वर्षीय नाबालिग बेटे को ‘फट्टे’ से पीटने का गंभीर आरोप
चौकी के भीतर मौजूद सूरज जैन और उनकी पत्नी ने पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनका 13 वर्षीय मासूम बेटा सिर्फ अपने माता-पिता के साथ चौकी आया था। लेकिन, कूकड़ा के सेकेंड चौकी इंचार्ज आकाश ओझा और अन्य पुलिसकर्मियों ने उस बच्चे के साथ अपराधियों जैसा बर्ताव किया। परिजनों का दावा है कि पुलिस ने बच्चे को ‘फट्टे’ (लकड़ी के तख्ते) से पीटा, जिससे उसकी कोहनी में गंभीर चोट आई है।
‘चार घंटे बैठाया, फिर आरोपियों को मामूली धारा में छोड़ा‘
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें करीब चार घंटे तक चौकी में बंधक जैसी स्थिति में बैठाकर रखा, जबकि दूसरी तरफ मुख्य आरोपी पुलिस से साठगांठ कर आराम से घूमते रहे। जैसे ही इस हंगामे की भनक स्थानीय मीडियाकर्मियों को लगी, वे कैमरों के साथ कूकड़ा चौकी पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मीडिया के कैमरे ऑन होते ही पुलिस का सख्त रवैया अचानक नरम पड़ गया। मामला तूल पकड़ता देख पुलिस ने आनंद-फानन में मुख्य आरोपी पवन और उसके साथी पर कार्रवाई तो की, लेकिन उन्हें महज शांतिभंग (धारा 151) की मामूली कार्रवाई कर छोड़ दिया गया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी है।
चौकी इंचार्ज ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
चौकी प्रभारी का पक्ष: मामले के बढ़ते विवाद पर प्रभारी चौकी इंचार्ज आकाश ओझा ने मीडिया के सामने आकर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस पर लगाए गए मारपीट के सारे आरोप पूरी तरह निराधार हैं। दूसरे पक्ष के दो लोगों के खिलाफ नियमानुसार शांतिभंग में चालान की कार्रवाई की गई है और किसी भी बच्चे या महिला के साथ कोई अभद्रता नहीं हुई है।











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