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राजधानी दिल्ली में अर्धसैनिक बलों ने संभाली सुरक्षा की कमान, 20 हजार अर्द्धसैनिक जवान और 500 कमांडो तैनात

दो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से पहले 18 मई से 3 जून तक रहेगा कड़ा पहरा, चप्पे-चप्पे पर होगी निगरानी
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली आगामी दो सप्ताह के भीतर दो बेहद हाई-प्रोफाइल और बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों, राजनयिकों और वैश्विक प्रतिनिधियों की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से अचूक और अभेद्य बना दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस की मांग पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 200 कंपनियां यानी कुल 20,000 मुस्तैद जवान और 500 जांबाज कमांडो राष्ट्रीय राजधानी में तैनात कर दिए हैं। सुरक्षा बलों की यह भारी-भरकम तैनाती 18 मई से प्रभावी हो चुकी है और 3 जून को सम्मेलनों के समापन व विदेशी मेहमानों की सुरक्षित रवानगी तक जारी रहेगी।

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सीआरपीएफ और बीएसएफ की सबसे ज्यादा कंपनियां संभालेंगी मोर्चा
दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर कानून-व्यवस्था और वीआईपी सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने के लिए गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों का एक बड़ा दस्ता उतारा है। सुरक्षा के इस महाप्लान में सर्वाधिक भागीदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की है। तैनात की गई 200 कंपनियों का विवरण इस प्रकार है:-
सीआरपीएफ: 70 कंपनियां
बीएसएफ: 55 कंपनियां
एसएसबी, सीआईएसफ और आईटीबीपी: 25-25 कंपनियां
विशेष दस्ता: 500 वीआईपी-सुरक्षा एक्सपर्ट कमांडो

गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक में मुहर
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में ‘विशेष पुलिस आयुक्त’ (परिचालन) को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने खतरे के इनपुट्स और संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की थी। मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय बैठक में गहन विचार-विमर्श के बाद इस कड़े सुरक्षा घेरे को तत्काल मंजूरी दी गई।

जी-20 जैसा सुरक्षा मॉडल: ‘रक्षकों’ की विशेष टीमें अलर्ट
इस बार की सुरक्षा व्यवस्था का खाका वर्ष 2023 में आयोजित हुए 18वें जी-20 शिखर सम्मेलन की तर्ज पर खींचा गया है। सूत्रों के मुताबिक, जी-20 के दौरान ग्रेटर नोएडा के वीआईपी सिक्योरिटी ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षित किए गए 1000 ‘रक्षकों’ (विशेष सुरक्षा जवानों) और उनकी 50 टीमों के अनुभवों का इस्तेमाल इस बार भी किया जा रहा है। ये वे जवान हैं जो पूर्व में एसपीजी (SPG) और एनएसजी (NSG) जैसी देश की शीर्ष सुरक्षा इकाइयों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। विदेशी मेहमानों के ‘कारकेड’ (काफिले) और बुलेटप्रूफ वाहनों की कमान इन्हीं चुनिंदा कमांडो और रक्षकों के हाथों में होगी। राजधानी के सभी प्रमुख होटलों, आयोजन स्थलों (प्रगति मैदान/भारत मंडपम व अन्य) और संवेदनशील चौराहों को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है। ड्रोन उड़ाने पर पूर्ण पाबंदी रहेगी और खुफिया एजेंसियां पल-पल की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

🌍 इन दो महा-सम्मेलनों की मेजबानी कर रहा है भारत?

1. चौथा भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन
तारीख: 31 मई (28-29 मई को तैयारी बैठकें और विदेश मंत्रियों की बैठक होगी)
थीम: “आईए स्पिरिट: नवाचार, लचीलापन और समावेशी परिवर्तन के लिए भारत-अफ्रीका रणनीतिक साझेदारी”
महत्व: विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा लॉन्च की गई वेबसाइट के तहत, इस सम्मेलन में अफ्रीकी महाद्वीप के शीर्ष नेता और क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधि रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने जुटेंगे।

2. प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (IBCA) शिखर सम्मेलन
तारीख: 1-2 जून
थीम: ‘बड़ी बिल्लियों को बचाएं, मानवता को बचाएं, पारिस्थितिकी तंत्र को बचाएं’
महत्व: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा घोषित इस अंतर-सरकारी संगठन का मुख्यालय भारत में ही है। सम्मेलन में दुनिया भर के 400 से अधिक नीति निर्माता, वैज्ञानिक और सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे, जो बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा जैसी 7 बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण का रोडमैप तैयार करेंगे।

 

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