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बड़ अमावस्या पर महिलाओं ने अखंड सौभाग्य के लिए अक्षय वट की परिक्रमा कर बांधा रक्षासूत्र

लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। (शुकतीर्थ)। तीर्थ नगरी शुकतीर्थ (शुकदेव आश्रम) में बड़ (वट) अमावस्या के पावन पर्व पर आस्था और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। दूर-दराज के जनपदों और स्थानीय क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने पतित-पावनी मां गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। वहीं, वट सावित्री का व्रत रखने वाली बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाओं ने महाभारत कालीन प्राचीन अक्षय वट वृक्ष की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर उसके चारों ओर सूत का धागा बांधा और दीपक जलाकर अपने सुहाग की लंबी आयु और रक्षा की कामना की। पर्व को लेकर पूरे दिन शुकतीर्थ नगरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती रही, जिसे देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
गंगा स्नान के बाद मंदिरों में टेका माथा, कराई सत्यनारायण कथा
शनिवार को सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। गंगा मैया के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने स्नान किया और सूर्य देव को अर्घ्य देकर दान-पुण्य किया। स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने सुप्रसिद्ध श्री शुकदेव मंदिर, हनुमद्धाम, गणेश धाम, शिव धाम, दुर्गा धाम, पार्वती धाम, अखंड धाम और गंगा मंदिर सहित सभी प्रमुख देवस्थानों के दर्शन किए। इस दौरान अनेक श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने पर तीर्थ नगरी में भगवान सत्यनारायण की कथा भी श्रवण की।
आश्रमों में गूंजे सत्संग-प्रवचन, अक्षय वट पर लगी कतारें
धार्मिक नगरी के प्रमुख दंडी आश्रम, महाशक्ति सिद्ध पीठ, श्री महेश्वर आश्रम, तिलकधारी आश्रम, मां पीतांबरा धाम, खिचड़ी वाले बाबा का आश्रम और मानव निर्माण योग आश्रम आदि में विशेष सत्संग एवं प्रवचन कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने गुरुओं का आशीर्वाद लिया। श्री शुकदेव आश्रम स्थित प्राचीन ‘अक्षय वट वृक्ष’ की पूजा के लिए सुबह से लेकर शाम तक महिलाओं की लंबी कतारें लगी रहीं। महिलाओं ने रोली, चंदन, फल और फूल अर्पित कर वट सावित्री की कथा सुनी।
सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। घाटों से लेकर मुख्य मंदिरों तक सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। महिला दरोगा अजय यादव पुलिस बल और महिला कांस्टेबलों के साथ मुख्य पूजा स्थलों और घाटों पर मुस्तैद रहीं, ताकि महिला श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और परिक्रमा करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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