
मुख्यालय से 4 किमी दूर था 2.4 तीव्रता के भूकंप का केंद्र, कहीं से नुकसान नहीं
लोकपथ लाइव, उत्तरकाशी: भूकंप की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में शुक्रवार देर रात आए भूकंप के हल्के झटकों ने एक बार फिर स्थानीय निवासियों को दहशत में डाल दिया। रात के सन्नाटे में अचानक धरती हिलने से मुख्यालय और आस-पास के क्षेत्रों में हड़कंप मच गया। लोग सोते हुए बिस्तरों से उठकर तुरंत खुले मैदानों और सड़कों की तरफ भागे। हालांकि, राहत की बात यह रही कि भूकंप बेहद हल्का था, जिससे किसी भी तरह की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।


उत्तर-पूर्व में 5 किमी गहराई पर था केंद्र
आपदा प्रबंधन विभाग से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 2.4 मापी गई है। भूकंप का मुख्य केंद्र उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से उत्तर-पूर्व दिशा में करीब चार किलोमीटर दूर जमीन के भीतर 5 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था। कम गहराई होने के बावजूद तीव्रता बेहद कम होने के कारण कोई अप्रिय घटना नहीं घटी।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट पर
जिला आपदा अधिकारी शार्दुल गुसाई ने बताया कि देर रात जनपद के कुछ हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। सूचना मिलते ही आपदा कंट्रोल रूम और संबंधित विभागों को सक्रिय कर दिया गया था। फिलहाल जिले में कहीं से भी किसी प्रकार के नुकसान की कोई खबर नहीं है। सभी तहसीलों से लगातार इनपुट लिए जा रहे हैं और स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है। इसके साथ ही प्रशासन ने आम जनता से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी आपात स्थिति में सीधे आपदा कंट्रोल रूम से संपर्क करने की अपील की है।
इसलिए बढ़ जाती है उत्तरकाशी की धड़कन?
1991 के जख्म आज भी भरे नहीं हैं। उत्तरकाशी के लोगों के लिए भूकंप का हर एक छोटा झटका भी बड़ी दहशत लेकर आता है। इसके पीछे साल 1991 में आई वह विनाशकारी आपदा है, जिसकी भयावह यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। 20 अक्तूबर 1991 की मध्य रात्रि को आए 6.6 तीव्रता के भीषण भूकंप ने पूरे जिले को तहस-नहस कर दिया था। उस त्रासदी में करीब 600 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी, जबकि 5 हजार से अधिक लोग घायल हुए थे। हजारों आशियाने पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील हो गए थे। स्थानीय बुजुर्गों और 1991 की विभीषिका को अपनी आंखों से देख चुके परिवारों का कहना है कि हल्का सा भी कंपन होने पर वे डर के मारे घर के अंदर नहीं रुक पाते। फिलहाल, मौसम और हालात सामान्य हैं, लेकिन आपदा प्रबंधन विभाग लगातार लोगों को भूकंप के दौरान अपनाए जाने वाले सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक कर रहा है।
थम नहीं रही है धरती की हलचल
विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तरकाशी जिला भूकंप के लिहाज से ‘अत्यंत संवेदनशील जोन’ में आता है। हिमालयी क्षेत्र में लगातार हो रही भूगर्भीय हलचल के कारण यहां समय-समय पर छोटे झटके आते रहते हैं, जो एक तरह से अंदरूनी ऊर्जा को बाहर निकालने का काम करते हैं। अगर पिछले कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तरकाशी की धरती लगातार डोल रही है। साल 2016 में कुल 09 बार भूकंप के झटके दर्ज किए गए। जबकि साल 2017 में सर्वाधिक 13 बार धरती कांपी। इसके बाद साल 2022 में कुल 05 बार भूकंपीय गतिविधियां रिकॉर्ड हुईं।












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