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चुनाव के बाद हिंसा की ‘जंग’ में बदला बंगाल, कहीं टूटी मूर्तियाँ, कहीं फूंके गए दफ्तर, दो कार्यकर्ताओं की हत्या

सड़कों पर उतरी आक्रोशित भीड़: भाजपा-टीएमसी के एक-एक कार्यकर्ता की हत्या, संदेशखाली में सीआरपीएफ जवान पर हमला
लोकपथ लाइव, कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही लोकतंत्र के उत्सव पर हिंसा का साया गहरा गया है। राज्य के कई हिस्सों में आगजनी, तोड़फोड़ और हत्याओं का खौफनाक सिलसिला शुरू हो गया है। सबसे चौंकाने वाली घटना में भीड़ ने लेनिन की मूर्ति को जमींदोज कर दिया, वहीं राजनीतिक रंजिश में भाजपा और टीएमसी दोनों दलों के एक-एक कार्यकर्ता की जान चली गई है।

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पश्चिम बंगाल में चुनाव के परिणाम आने के बाद शांति बहाल होने के बजाय हिंसा का तांडव शुरू हो गया है। आसनसोल उत्तर के कोर्ट मोड़ इलाके में टीएमसी पार्षद मौसमी बोस के दफ्तर को देर रात आग के हवाले कर दिया गया। आग इतनी भयंकर थी कि पूरा दफ्तर जलकर खाक हो गया और पास की एक दुकान को भी भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को देकर आग पर काबू पाया। इसी तरह कोलकाता के कसबा इलाके में रूबी क्रॉसिंग के पास और टॉलीगंज में भी भीड़ ने भाजपा के झंडे लेकर टीएमसी नेताओं के दफ्तरों में भारी तोड़फोड़ की। सिलीगुड़ी में भी टीएमसी कार्यालय में आग लगाने की घटना का वीडियो सामने आया है, जिससे राज्य में कानून व्यवस्था पर गहरे सवाल उठ रहे हैं। हिंसा की सबसे भीषण तस्वीर न्यू टाउन और बीरभूम से सामने आई। कई जगहों पर भीड़ ने भाजपा के झंडे लेकर टीएमसी कार्यालयों पर कब्जा करने की कोशिश की, तो कहीं कांग्रेस समर्थकों ने टीएमसी दफ्तरों पर अपना नियंत्रण जमा लिया। न्यू टाउन में भाजपा की विजय रैली के दौरान हुए संघर्ष में एक भाजपा कार्यकर्ता की मौत हो गई। वहीं, बीरभूम के नानूर में टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिसका आरोप भाजपा समर्थकों पर लगा है। तनाव यहीं नहीं रुका; संदेशखाली में ड्यूटी पर तैनात एक सीआरपीएफ जवान के घायल होने की भी खबर है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

चुनाव आयोग का कड़ा फरमान: उपद्रवियों को सीधा जेल भेजें
चुनाव के बाद भड़की इस भीषण हिंसा पर चुनाव आयोग (ECI) ने अपना सबसे सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्य सचिव और डीजीपी को मिली खुली छूट देते हुए आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी राजनीतिक संरक्षण को नजरअंदाज कर अपराधियों पर नकेल कसी जाए। निर्देश स्पष्ट हैं कि बिना यह देखे कि आरोपी किस दल का है, तुरंत और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। केंद्रीय सुरक्षा बलों को संवेदनशील इलाकों में तुरंत स्थिति को नियंत्रण में लेने को कहा गया है। अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि हिंसा नहीं रुकी, तो स्थानीय जवाबदेही तय की जाएगी। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला और डीजीपी सिद्धार्थ नाथ गुप्ता को ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति अपनाने का आदेश दिया है।

‘हार की हताशा या जीत का अहंकार?’
टीएमसी सांसद सागरिका घोष और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कड़े शब्दों में हमले की निंदा करते हुए कहा कि भाजपा चुनाव जीतने के बाद लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर सरेआम गुंडागर्दी कर रही है। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि उनके उम्मीदवारों और जमीनी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाकर जानलेवा हमले किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। भाजपा के वरिष्ठ नेता राहुल सिन्हा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तोड़फोड़ में भाजपा का कोई हाथ नहीं है। सिन्हा के अनुसार, यह टीएमसी की अपनी अंदरूनी गुटबाजी और चुनाव परिणामों से उपजी गहरी हताशा का सीधा नतीजा है। अपनी विफलता छिपाने के लिए भाजपा पर झूठे इल्जाम लगाए जा रहे हैं। वहीं टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि भाजपा जीत के नशे में चूर होकर सरेआम गुंडागर्दी कर रही है। दूसरी ओर, भाजपा के वरिष्ठ नेता राहुल सिन्हा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे टीएमसी की अंदरूनी गुटबाजी और चुनावी हताशा का परिणाम करार दिया है।

 

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