
लोकपथ लाइव, डेस्क। प्रेम, जीवन और मानवीय संवेदनाओं की गहराइयों को शब्दों में पिरोना एक जटिल कला है, जिसे युवा लेखिका कृति बघेल ने अपने नए काव्य-संग्रह ‘कमली’ के माध्यम से जीवंत कर दिया है। साहित्यिक हलकों में कृति की इस कृति को लेकर विशेष चर्चा है। उनकी रचनाएँ केवल कविताएँ नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी आत्मीय यात्रा हैं, जो पाठक को हृदय की गहराइयों तक ले जाती हैं।
प्रेम के विविध रंग और सामाजिक सरोकार
कृति बघेल का यह संग्रह प्रेम के विभिन्न आयामों को उजागर करता है। इसमें जहाँ एक ओर समंदर-सा अथाह प्रेम और सावन-सी भीगी अनुभूतियाँ हैं, वहीं दूसरी ओर पतझड़ की खामोश उदासी और बिछड़ने की कसक भी साफ झलकती है। उनकी कविताएँ जीवन की जटिलताओं और भावनात्मक संघर्षों को बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती हैं। इस संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल व्यक्तिगत भावनाओं तक सीमित न रहकर समाज के अनछुए पहलुओं, विशेषकर महिलाओं के संघर्ष और उनकी स्वतंत्रता पर बेबाकी से बात करता है।
अनुभव की आंच में तपकर निकली कविताएँ
मूल रूप से कानपुर की रहने वाली कृति बघेल का नोएडा में रहती है। कृति बघेल का पेशेवर सफर काफी समृद्ध रहा है। पत्रकारिता में परास्नातक के बाद उन्होंने इंडिया टीवी और एबीपी न्यूज़ जैसे संस्थानों में अपनी पहचान बनाई। इसके उपरांत उन्होंने भारत सरकार के ‘स्वच्छ भारत मिशन’ में सोशल मीडिया मिशन मैनेजर और डीडी न्यूज़ में कंटेंट मैनेजर के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर कार्य किया। वर्तमान में वे पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में एसोसिएट मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। उनके ये विविध अनुभव उनकी कविताओं में गहराई और परिपक्वता लाते हैं। उनकी कविता “क्या इस दुनिया की सारी औरतें ऐसे ही मरती होंगी?” आज के दौर की कड़वी सच्चाई को उजागर करती है। यह पुस्तक वर्तमान में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेजन और फ्लिपकार्ट पर पाठकों के लिए उपलब्ध है।
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