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हृदय विदारक: 100 साल की दादी की अंतिम विदाई बनी पोतों का अंतिम सफर, गंगा लहरों में समाए 4 पोते

हस्तिनापुर के मखदूमपुर घाट पर नहाते समय हुआ हादसा, माता का विलाप ‘गंगा मैया मुझे ले जाओ, मेरे बच्चे लौटा दो’
लोकपथ लाइव, हस्तिनापुर(मेरठ)। मेरठ के इंचौली थाना क्षेत्र के जलालपुर गांव में एक ऐसा वज्रपात हुआ है जिसने पूरे क्षेत्र को सुन्न कर दिया है। 100 वर्षीय दादी भगवती देवी को अंतिम विदाई देने सपरिवार मखदूमपुर गंगा घाट पहुंचे चार चचेरे भाई खुद मौत के आगोश में समा गए। अंतिम संस्कार के बाद गंगा स्नान करते समय गहरे पानी की चपेट में आने से चारों युवक डूब गए। चीख-पुकार के बीच एक युवक को तो बचा लिया गया, लेकिन बाकी चार का देर रात तक सुराग नहीं लग सका।

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जानकारी के अनुसार, जलालपुर निवासी 100 वर्षीय भगवती देवी का शुक्रवार को निधन हो गया था। पूरा परिवार उनके अंतिम संस्कार के लिए हस्तिनापुर के मखदूमपुर घाट गया था। मुखाग्नि के बाद परिवार के युवा अभिषेक (21), हिमांशु (17), दीपांशु (17), प्रियांशु (15) और एक अन्य परिजन प्रदीप गंगा में स्नान करने लगे। इसी दौरान संतुलन बिगड़ने से पांचों गहरे पानी में चले गए। घाट पर मौजूद राहुल नामक युवक ने जान जोखिम में डालकर प्रदीप को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन बाकी चार भाई लहरों के वेग में ओझल हो गए।

दो सगे भाइयों के उजड़ गए संसार
इस हादसे ने दो सगे भाइयों, कमल सिंह सैनी और सोनू, के हंसते-खेलते परिवारों को तबाह कर दिया है। कमल सिंह के बेटे अभिषेक (एलएलबी छात्र) और हिमांशु (10वीं का छात्र), सोनू के बेटे दीपांशु (12वीं का छात्र) और प्रियांशु (10वीं का छात्र) मृतकों में शामिल हैं। परिजनों ने बताया कि चारों भाई पढ़ाई में अत्यंत होनहार थे और परिवार की उम्मीदें उन पर टिकी थीं। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि दादी की अंतिम यात्रा पोतों का भी अंतिम सफर साबित होगी। पूरे जलालपुर गांव में चूल्हे नहीं जले और हर आंख नम है। सोनू बिलखते हुए बस यही कह रहे थे, कि मेरा सब कुछ खत्म हो गया, मेरे बुढ़ापे के सहारे चले गए। घर में अब केवल एक इकलौती बेटी बची है।

माताओं का करुण विलाप
घाट से लेकर गांव तक सिर्फ सिसकियों की आवाजें सुनाई दे रही हैं। चारों भाइयों की माताओं का रो-रोकर बुरा हाल है। सोनू की पत्नी मुनेश बार-बार गंगा की लहरों की ओर हाथ जोड़कर गुहार लगा रही थीं। गंगा मैया मुझे ले जाओ, मेरे बच्चों को लौटा दो।” वहीं दूसरी मां बिजेंद्री अपने बेटों के कपड़ों को कलेजे से लगाकर बार-बार बेसुध हो रही थीं।

प्रशासनिक अमला अलर्ट, रात भर चली तलाश
घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी अविनाश पांडेय, एडीएम सूर्यकांत त्रिपाठी और एसपी देहात अभिजीत कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पीएसी की फ्लड कंपनी (बाढ़ नियंत्रण इकाई) को तत्काल बुलाया गया। रात के अंधेरे में तलाशी जारी रखने के लिए मवाना नगर पालिका से हाई-मास्ट लाइटें और जनरेटर मंगवाए गए। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया और गोताखोरों को निर्देश दिए कि जब तक सुराग न मिले, ऑपरेशन जारी रखा जाए।

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