Select Language :

Home » राजनीति » पश्चिम बंगाल मतदाता सूची विवाद: सुप्रीम कोर्ट का ट्रिब्यूनलों के काम में दखल से इनकार

पश्चिम बंगाल मतदाता सूची विवाद: सुप्रीम कोर्ट का ट्रिब्यूनलों के काम में दखल से इनकार

राज्य में 60 लाख में से 47 लाख आपत्तियों का निपटारा, 7 अप्रैल तक प्रक्रिया होगी पूरी
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर चल रहे कानूनी घमासान में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने जानकारी दी कि राज्य में अब तक 47 लाख आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है। अदालत ने स्पष्ट किया कि शेष आपत्तियों को 7 अप्रैल तक सुलझा लिया जाएगा।

How to Make a News Portal

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शीर्ष अदालत को बताया गया कि प्रशासन युद्धस्तर पर काम कर रहा है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 1.75 लाख से 2 लाख आपत्तियों पर कार्रवाई की जा रही है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने भरोसा जताया कि निर्धारित समय सीमा (7 अप्रैल) के भीतर सभी 60 लाख आपत्तियों की स्क्रूटनी पूरी कर ली जाएगी। मामले की अगली सुनवाई अब 7 अप्रैल को होगी, जिस दिन यह स्पष्ट हो जाएगा कि अंतिम मतदाता सूची का स्वरूप क्या होगा।

नाम हटाने की दर पर तीखी बहस
सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की दर 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो कि असामान्य रूप से अधिक है। इस पर जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रिब्यूनलों को अपना काम करने दिया जाना चाहिए। विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने हितों के अनुसार 100 प्रतिशत नाम शामिल करने या 100 प्रतिशत नाम हटाने की मांग कर सकते हैं, लेकिन अदालत और ट्रिब्यूनल केवल नियमों और तथ्यों पर चलेंगे।

सुरक्षा और न्यायिक निष्पक्षता पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के निर्देशों को दोहराते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी को पूरक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि एसआईआर अधिकारियों को मिल रही धमकियों पर क्या कार्रवाई की गई। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

दिग्गज वकीलों की फौज मैदान में
इस हाई-प्रोफाइल मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से दिग्गज वकील कपिल सिब्बल, श्याम दीवान, गोपाल शंकरनारायणन और कल्याण बनर्जी ने दलीलें दीं। वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने रखा।

 

Share this post:

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

खबरें और भी हैं...

वोट करें

Are You Satisfied Lokpath Live

Our Visitor

0 8 3 6 5 2
Total views : 262567

Follow us on