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अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी: सनातन संस्कृति का गौरव वैश्विक स्तर पर स्थापित: आचार्य बालकृष्ण

पतंजलि में गुणवत्ता व मानकों का शीर्ष प्राधिकरण: सचिन चौधरी
टेलीमेडिसिन, स्वास्थ्य सेवाओं की एक उभरती हुई विधा: प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा
लोकपथ लाइव, हरिद्वार: पतंजलि विश्वविद्यालय में ‘स्वास्थ्य सेवा और प्रबंधन में स्मार्ट तकनीकों के एकीकरण’ पर त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवा और प्रबंधन को सशक्त बनाने के लिए स्मार्ट तकनीकों के एकीकरण पर जोर दिया गया।

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पतंजलि विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की के तत्वावधान में अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से अमेरिका की शैक्षणिक शाखा ग्लोबल नॉलेज फाउंडेशन, निदेशक, भारतीय मानक ब्यूरो, देहरादून और यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड ईस्टर्न शोर के बिजनेस, मैनेजमेंट और अकाउंटिंग विभाग की संयुक्त पहल में पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन एवं विश्वविद्यालय के सभागार में ‘स्वास्थ्य सेवा और प्रबंधन में स्मार्ट तकनीकों के एकीकरण’ विषय पर आयोजित त्रिदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी स्मार्ट तकनीकों के एकीकरण के माध्यम से प्रौद्योगिकी-प्रेरित, दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रबंधन को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर जन-स्वास्थ्य सुधार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय मानक ब्यूरो के सचिन चौधरी ने द्वारा राष्ट्रीय मानकों, गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया। वहीं आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. कमलकिशोर पंत ने टेलीमेडिसिन, डिजिटल स्वास्थ्य, एआई और भारतीय संस्कृति के वैश्विक महत्व पर विचार साझा किए।

‘सहस्त्र चंद्र दर्शन’ भारतीय सनातन परंपरा
आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि ‘सहस्त्र चंद्र दर्शन’ भारतीय सनातन परंपरा में दीर्घायु, स्वस्थ और ज्ञानपूर्ण जीवन के उत्सव का प्रतीक है, जिसका सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। आज सनातन संस्कृति का गौरव वैश्विक स्तर पर स्थापित हो रहा है। उन्होंने भूमंडलीकरण की अवधारणा पर कहा कि इससे विश्व के देश आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं, जिससे विश्व ‘वैश्विक गांव’ बन रहा है। ‘स्वास्थ्य सेवा में इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ की भूमिका पर उन्होंने कहा कि वियरेबल सेंसर, कनेक्टेड मेडिकल पंप और अस्पतालों के स्मार्ट उपकरण इंटरनेट व सॉफ्टवेयर के माध्यम से जुड़े रहते हैं, जिससे स्वास्थ्य डेटा का संग्रह, साझा कर विश्लेषण संभव होता है। इससे पूर्व आचार्य बालकृष्ण ने अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न देकर किया। शुभारंभ दीप प्रज्वलन, धन्वंतरि वंदना और श्री चंद्रमोहन व उनकी टीम के समूहगान से हुआ। कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन कुलपति प्रो. मयंक कुमार अग्रवाल ने दिया, तत्पश्चात आचार्य एवं अतिथियों ने सार पुस्तक का लोकार्पण किया।

डिजिटल स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर
संगोष्ठी में डॉ. देव शर्मा ने कबीर के दोहे के माध्यम से सेवा और लोककल्याण पर जोर दिया, डिजिटल स्वास्थ्य प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और एआई-सहायित स्मार्ट प्रणालियों के माध्यम से सुरक्षित, प्रभावी और उन्नत चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता रेखांकित की। जबकि आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने आधुनिक एआई जीवन के हर पहलू  पर नैतिकता आवश्यक बताया। पतंजलि हर्बल रिसर्च की अनुसंधान प्रमुख डॉ. वेदप्रिया आर्या ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों का समग्र परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को पुनः दोहराया। इसके अलावा, अन्य विशेषज्ञों डॉ. प्रशांत कटियार, डॉ. कनक सोनी, प्रो. मयंक अग्रवाल, डॉ. सविता और समस्त पतंजलि वैज्ञानिक, छात्र-छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही।

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