Select Language :

Home » अंतर्राष्ट्रीय » राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन संपन्न

राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन संपन्न

समावेशी, उत्तरदायी और जनता के प्रति जवाबदेह होने से सशक्त होंगी लोकतांत्रिक संस्थाएं: लोकसभा अध्यक्ष
29वें सीएसपीओसी की अध्यक्षता करेगा यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ कॉमन्स
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सर लिंडसे होयल को सौंपी 29वें सीएसपीओसी की अध्यक्षता
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन (सीएसपीओसी) लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक जन-केंद्रित बनाने की नवीकृत प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुआ। सम्मेलन के समापन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 29वें सीएसपीओसी की अध्यक्षता यूनाइटेड किंगडम के हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष सर लिंडसे होयल को सौंपी,जो लंदन में आयोजित अगले सीएसपीओसी की अध्यक्षता करेगा।

How to Make a News Portal

भारतीय संसद परिसर स्थित संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों एवं पीठा

सीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन के समापन संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं तभी सशक्त और प्रासंगिक बनी रह सकती हैं जब वे पारदर्शी, समावेशी, उत्तरदायी और जनता के प्रति जवाबदेह हों। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता निर्णय-प्रक्रिया में खुलेपन को सुनिश्चित कर जनता के विश्वास को बढ़ाती है, जबकि समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में प्रत्येक आवाज़, विशेषकर समाज के हाशिये पर खड़े लोगों की सुनी जाए और उसका सम्मान हो। उन्होने सीएसपीओसी की स्थापना के पीछे 56 वर्ष पूर्व की परिकल्पना को याद करते हुए कहा कि यह सम्मेलन राष्ट्रमंडल की लोकतांत्रिक विधायिकाओं के बीच सतत संवाद सुनिश्चित करने तथा संसदीय कार्यकुशलता और उत्तरदायित्व को बढ़ाने के नए उपायों की खोज के उद्देश्य से स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि 28वें सीएसपीओसी ने इस विरासत को नई ऊर्जा और सार्थकता के साथ आगे बढ़ाया है।

स्वास्थ्य एवं कल्याणकारी विषयों पर चर्चा
सम्मेलन के सत्रों पर चर्चा करते हुए बिरला ने कहा कि संसदों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग, सोशल मीडिया के प्रभाव, चुनावों से परे नागरिक सहभागिता, तथा सांसदों और संसदीय कर्मचारियों के स्वास्थ्य एवं कल्याण जैसे विषयों पर हुई चर्चाएँ विशेष रूप से विचारोत्तेजक रहीं। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि प्रौद्योगिकी, समावेशन और वैश्विक साझेदारियाँ नई विश्व व्यवस्था को आकार देंगी। बिरला ने सभी प्रतिनिधिमंडलों की सक्रिय भागीदारी, उत्साह और रचनात्मक भावना के लिए प्रशंसा की, जिसने सम्मेलन को सार्थक और स्मरणीय बनाया। उन्होंने कहा कि चर्चाओं से यह स्पष्ट हुआ कि संसदों को अधिक जन-केंद्रित, जवाबदेह और प्रभावी बनाने पर सामूहिक चिंतन के लिए सीएसपीओसी एक अद्वितीय मंच के रूप में आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने ऐतिहासिक संविधान सदन में सम्मेलन का उद्घाटन करने और अपने प्रेरणादायी संबोधन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की, जिसमें भारत की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत और चुनौती के समय वैश्विक समुदाय के साथ खड़े रहने की उसकी दृढ़ प्रतिबद्धता को प्रभावशाली ढंग से रेखांकित किया गया। उन्होंने भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के पीठासीन अधिकारियों से संवाद के लिए भी आभार जताया।

विधायी प्रस्तावों की जाँच-पड़ताल पर बल
इससे पहले विशेष पूर्णाधिवेशन की अध्यक्षता करते हुए बिरला ने कहा कि आधुनिक लोकतंत्र अभूतपूर्व अवसरों के साथ-साथ जटिल, बहुआयामी चुनौतियों का भी सामना कर रहे हैं। बिरला ने संसदीय स्थायी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए कहा कि इन्हें प्रायः “लघु संसद” कहा जाता है, तथा बजट एवं अन्य विधायी प्रस्तावों की जाँच-पड़ताल में उनकी भूमिका संसदीय पर्यवेक्षण का उच्च मानक स्थापित करती है। उन्होंने संसद के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने के लिए पीठासीन अधिकारियों से इन समितियों के गठन और उन्हें और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे जनता की चिंताओं को अनुशासित, रचनात्मक और जिम्मेदार तरीके से सदन के समक्ष प्रस्तुत करें।

Share this post:

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments

खबरें और भी हैं...

वोट करें

Are You Satisfied Lokpath Live

Our Visitor

0 6 0 6 9 7
Total views : 183099

Follow us on