
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर: जनपद में अवैध रूप से नारकोटिक्स और नशीली दवाओं का व्यापार करने वाले थोक दवा विक्रेताओं के खिलाफ औषधि प्रशासन विभाग ने बड़ा एक्शन लिया है। सहारनपुर मंडल के औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी ने मुजफ्फरनगर के औषधि निरीक्षक की जांच रिपोर्ट के आधार पर दो बड़ी थोक दवा फर्मों के विक्रय लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) कर दिए हैं। इसके साथ ही नियमों की अनदेखी करने वाली अन्य चार से पांच फर्मों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
इन दो फर्मों पर हुई बड़ी कार्रवाई
औषधि निरीक्षक देशबंधु विमल द्वारा की गई जांच के बाद दो फर्मों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं। इसमें मैसर्स प्रधान मेडिकल एजेंसी (मीरापुर) पर निरीक्षण के दौरान पाया गया कि यह फर्म स्वीकृत पते पर संचालित नहीं हो रही थी। मौके पर दुकान का कोई भौतिक अस्तित्व या साइन बोर्ड तक नहीं मिला। साथ ही औषधियों का क्रय-विक्रय और भंडारण भी शून्य पाया गया। वहीं, मैसर्स उर्वशी मेडिकोज (अंसारी रोड, मुजफ्फरनगर) पर आरोप है कि उसका लाइसेंस पहले ही निलंबित किया गया था, लेकिन निलंबन अवधि के दौरान भी धड़ल्ले से 36 प्रकार की नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं की खरीद जारी रखी गई। एनसीबी (NCB) सब जोनल यूनिट देहरादून ने भी अवगत कराया था कि यह फर्म स्वीकृत पते पर नहीं चल रही थी और इस पर एनडीपीएस (NDPS) मामलों में भी जांच चल रही थी।
डीआई देशबंधु विमल ने बताया कि दोनों फर्मों की जांच आख्या के आधार पर लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति भेजी गई थी, जिस पर सहारनपुर मंडल के औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी नरेश मोहन दीपक ने कड़ा कदम उठाते हुए लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिए हैं। विभाग इन पर पैनी नजर रखे हुए है।


जिला परिषद मार्केट समेत अन्य ठिकानों पर रडार पर पांच और फर्म
मुजफ्फरनगर के जिला परिषद मार्केट और अन्य प्रमुख इलाकों में कई ऐसे थोक दवा व्यापारी भी चिन्हित किए गए हैं, जिनके लाइसेंस या तो निष्क्रिय हैं या वे नियमों का खुला उल्लंघन कर नशीली दवाओं के अवैध विक्रय में लिप्त हैं। औषधि विभाग ने इन सभी संदिग्ध फर्मों की जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है, जिन पर जल्द ही बड़ा शिकंजा कसा जाएगा।
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