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पांच राज्यों ने पलटा सियासत का पासा: पूरब में ‘प्रचंड भगवा’ का उदय, दक्षिण में ‘विजय’ का शंखनाद

बंगाल में ममता का किला ध्वस्त, असम-पुडुचेरी में भाजपा की हैट्रिक
केरल में चला कांग्रेस का हाथ और तमिलनाडु में दिखा सिनेमाई करिश्मा
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: भारतीय राजनीति के इतिहास में आज का दिन बड़े उलटफेरों के नाम रहा। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने न केवल पुराने किलों को ढहा दिया है, बल्कि नए सियासी चेहरों को भी स्थापित किया है। पश्चिम बंगाल में जहाँ भाजपा ने दो सौ का आंकड़ा पार कर इतिहास रच दिया, वहीं तमिलनाडु में ‘सुपरस्टार’ विजय की पार्टी ने द्रविड़ राजनीति की जड़ों को हिला कर रख दिया है।

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कोलकाता के तख्त पर पहली बार भाजपा का राज
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा ने अकल्पनीय प्रदर्शन करते हुए 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) मात्र 81 सीटों पर सिमट गई है। बंगाल के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार है जब किसी दक्षिणपंथी पार्टी ने स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता हासिल की है। अन्य का हाल: कांग्रेस और वामदल पूरी तरह हाशिए पर चले गए हैं, जिन्हें महज इक्का-दुक्का सीटों पर संतोष करना पड़ा है। पश्चिम बंगाल में भाजपा ने वह कर दिखाया जो अब तक नामुमकिन माना जा रहा था। ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाते हुए भाजपा ने न केवल बहुमत हासिल किया, बल्कि 206 सीटों के साथ प्रचंड जीत दर्ज की।
कुल सीटें: 294 (बहुमत: 148)
भाजपा: 206 सीटें (ऐतिहासिक जीत)
टीएमसी: 81 सीटों पर सिमटी (ममता बनर्जी खुद भवानीपुर सीट से चुनाव हार गईं)
अन्य: कांग्रेस-वामदल गठबंधन का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा।

असम और पुडुचेरी: उत्तर-पूर्व में ‘कमल’ की हैट्रिक
असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राजग (NDA) ने रिकॉर्ड तोड़ वापसी की है। 126 सीटों में से भाजपा अकेले 82 सीटें जीतने में सफल रही, जबकि गठबंधन ने 102 का आंकड़ा छुआ। कांग्रेस यहाँ 15-19 सीटों के बीच जूझती नजर आई। वहीं, पुडुचेरी में भी एनडीए ने 18 सीटों के साथ अपनी सत्ता को बरकरार रखा है। असम में भाजपा के नेतृत्व वाले राजग (NDA) ने अपनी सत्ता बरकरार रखते हुए हैट्रिक लगाई है।
कुल सीटें: 126
भाजपा (अकेले): 82 सीटें
राजग (NDA) कुल: 102 सीटें
कांग्रेस: मात्र 15-19 सीटों के बीच सिमटी।

पुडुचेरी: NDA का दबदबा बरकरार
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भाजपा समर्थित AINRC गठबंधन ने फिर से अपनी सरकार सुरक्षित कर ली है।
NDA: 18 सीटें (AINRC 12, भाजपा 4, अन्य 2)।
बहुमत मार्क: 16 सीटें।

तमिलनाडु: द्रविड़ राजनीति में सबसे बड़ा उलटफेर
दक्षिण के इस राज्य से सबसे चौंकाने वाली खबर आई है। दो साल पहले राजनीति में कदम रखने वाले अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) ने सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले ली है। TVK ने 234 में से 106 सीटों पर कब्जा जमाया है। सत्ताधारी DMK मात्र 60 सीटों पर सिमट गई, जबकि AIADMK को 47 सीटें मिलीं। भाजपा ने भी यहाँ 1 सीट जीतकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। तमिलनाडु के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। अभिनेता विजय की नवगठित पार्टी तमिलगा वेट्टी कड़गम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जिसने द्रविड़ राजनीति के दो स्तंभों (DMK और AIADMK) को पीछे छोड़ दिया।
TVK: 106+ सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी (विजय खुद दो सीटों से जीते)।
DMK: सत्ता से बाहर, लगभग 60 सीटों पर सिमटी।
AIADMK: 47 सीटों पर जीत हासिल की।

केरल: ‘लाल किला’ ढहा, ‘हाथ’ को मिला सत्ता का साथ
केरल ने अपनी दशकों पुरानी परंपरा को निभाते हुए वामपंथी सरकार (LDF) को सत्ता से बेदखल कर दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने 140 सीटों में से 100 सीटें जीतकर शानदार वापसी की है। कांग्रेस का दबदबा: गठबंधन में अकेले कांग्रेस ने 63 सीटें जीतीं। पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली CPI(M) केवल 26 सीटों पर सिमट कर रह गई। भाजपा के लिए राहत की बात यह रही कि उसने राज्य में 3 सीटें जीतकर अपनी पैठ बढ़ाई है। केरल में हर 5 साल में सरकार बदलने की परंपरा फिर से लौट आई है। वामपंथी सरकार (LDF) को हटाकर कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने सत्ता में वापसी की है।
UDF (कांग्रेस गठबंधन): 102 सीटें (बहुमत हासिल)।
LDF (वामदल): 35 सीटें।
भाजपा: केरल में अपना खाता खोलते हुए 3 सीटें जीतने में सफल रही।

निष्कर्ष
पांचों राज्यों के चुनावी परिणामों के इन परिणामों से स्पष्ट है कि जनता ने कहीं ‘एंटी-इंकंबेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) को चुना है, तो कहीं नए चेहरों पर भरोसा जताया है। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में अब इन परिणामों के दीर्घकालिक प्रभाव पर चर्चा शुरू हो गई है। भारतीय राजनीति के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो रही है। मई 2026 के इन विधानसभा चुनाव परिणामों ने कई दशकों के समीकरणों को बदलकर रख दिया है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के नतीजे सबसे अधिक चौंकाने वाले रहे हैं।

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