
लोकपथ लाइव, अयोध्या: राम नगरी अयोध्या एक बार फिर भव्य और अलौकिक दीपोत्सव के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हो रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में आयोजित होने जा रहे इस दसवें दीपोत्सव को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बनाने के लिए सरयू तट पर युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इस बार प्रशासन ने 56 घाटों पर कुल 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का भव्य लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए घाटों की साफ-सफाई के उपरांत मार्किंग का कार्य भी आरंभ हो चुका है। दीपों की सुसज्जा से लेकर हजारों स्वयंसेवकों की तैनाती तक की तमाम व्यवस्थाएं पूरी योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाई जा रही हैं। दीपोत्सव के इस पावन आयोजन के विधिवत शुभारंभ के लिए शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन संपन्न होगा।
30 लाख दीपों के लक्ष्य के लिए मंगाए जा रहे 33 लाख दीप
डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं दीपोत्सव के नोडल अधिकारी प्रो. संत शरण मिश्र ने जानकारी देते हुए बताया कि दीयों को सुरक्षित लाने और घाटों पर बिछाने की प्रक्रिया के दौरान कुछ दीयों के टूटने की संभावना रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए, 30 लाख दीपों को प्रज्ज्वलित करने के मुख्य लक्ष्य के मुकाबले कुल 33 लाख दीपों की व्यवस्था की जा रही है। घाटों की सफाई के पश्चात सुव्यवस्थित ढंग से मार्किंग का कार्य शुरू कर दिया गया है। दीपोत्सव से संबंधित समस्त सामग्रियों को नगर निगम के रानी हो पार्क के पास सुरक्षित रखवाया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया को सुचारू और सुव्यवस्थित रूप दिया जा सके।
शुक्रवार को घाट संख्या 10 पर होगा भूमि पूजन
दीपोत्सव का आयोजन सकुशल और निर्विघ्न रूप से संपन्न हो, इस कामना के साथ अवध विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सुबह 7:30 बजे सरयू तट स्थित घाट संख्या 10 पर विशेष भूमि पूजन किया जाएगा। यह धार्मिक अनुष्ठान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के कर-कमलों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के तमाम वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य और विभिन्न समितियों के समन्वयक भी उपस्थित रहेंगे।
56 घाटों पर माइक्रो-प्लानिंग के तहत होगी दीपों की सजावट
इस वर्ष विस्तारित राम की पैड़ी, चौधरी चरण सिंह घाट और भजन संध्या स्थल समेत कुल 56 घाटों को दीपों की रोशनी से सजाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले दीपोत्सव का आयोजन 55 घाटों पर किया जाता था। नोडल अधिकारी प्रो. संत शरण मिश्र ने बताया कि सभी घाटों पर दीपों की एक समान और सुंदर श्रृंखला बिछाने के लिए ‘माइक्रो-प्लानिंग’ के आधार पर कार्य किया जा रहा है, जिससे निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी हो सकें।
मार्किंग कमेटी के संयोजक एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि दीपों को बेहद सटीक और आकर्षक रूप देने के लिए चार-चार वर्ग फीट के विशेष ब्लॉक चिह्नित किए जा रहे हैं। प्रत्येक ब्लॉक में तय संख्या के अनुसार दीपों की सजावट का खाका तैयार किया गया है। उनकी टीम अगले तीन से चार दिनों के भीतर मार्किंग के इस महत्वपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लेगी।
35 हजार वालंटियर संभालेंगे दीप सज्जा की कमान
इस वृहद दीपोत्सव को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए लगभग 35 हजार वालंटियर्स (स्वयंसेवकों) की फौज मैदान में उतरेगी। इनमें करीब 30 डिग्री कॉलेज, 40 इंटर कॉलेज और अवध विश्वविद्यालय परिसर के ऊर्जावान छात्र-छात्राएं शामिल हैं। साकेत महाविद्यालय, राजकरण वैदिक पाठशाला इंटर कॉलेज, साहबदीन सीताराम इंटर कॉलेज, मनोहर लाल इंटर कॉलेज, आर्य कन्या इंटर कॉलेज, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, शिव सावित्री महाविद्यालय, कैनोसा इंटर कॉलेज, ग्रामर इंटरनेशनल स्कूल, एमआर जयपुरिया स्कूल, बीएस गर्ल्स डिग्री कॉलेज और भगवान आशा बख्श सिंह महाविद्यालय सहित विभिन्न प्रमुख शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थी इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। ये वालंटियर घाटों पर दीपों को करीने से बिछाने से लेकर उन्हें तय समय पर प्रज्ज्वलित करने तक की पूरी जिम्मेदारी संभालेंगे। विद्यार्थियों को इसके लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्र से होगी स्वयंसेवकों की पहचान
लाखों दीयों को एक साथ प्रज्ज्वलित कर एक बार फिर नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी के बीच स्वयंसेवकों का ऑनलाइन पंजीकरण अपने अंतिम चरण में है। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी वालंटियर्स को उनकी घाटवार जिम्मेदारियां और विशेष पहचान पत्र बांटे जाएंगे। इन क्यूआर कोड युक्त पहचान पत्रों पर वालंटियर का नाम, स्पष्ट फोटो, मोबाइल नंबर, तैनाती स्थल और उनका निर्धारित क्रमांक दर्ज होगा। साथ ही इन पर जिला प्रशासन के प्राधिकृत अधिकारी, दीपोत्सव नोडल अधिकारी और संबंधित शिक्षण संस्थान के अधिकृत प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी मौजूद रहेंगे। इस तकनीकी व्यवस्था से स्वयंसेवकों की पहचान का सत्यापन बेहद आसान होगा और किसी भी प्रकार की डुप्लीकेसी या अनियमितता को रोकने में मदद मिलेगी। फिलहाल, अवध विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन आपसी तालमेल के साथ दीपों की उपलब्धता, घाटों की व्यवस्था, स्वयंसेवकों की सुरक्षा और अनुशासन से जुड़े हर पहलू पर बारीकी से काम कर रहे हैं, ताकि दसवें दीपोत्सव में 30 लाख दीपों से सरयू का तट अलौकिक रूप से जगमगा उठे।
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