
लोकपथ लाइव, मेरठ। मोहिउद्दीनपुर स्थित न्यू इंटीग्रेटेड टाउनशिप में शनिवार को भारतीय वायुसेना की प्रसिद्ध ‘सूर्यकिरण’ एयरोबैटिक टीम ने अपने हैरतअंगेज करतबों से मेरठवासियों का दिल जीत लिया। केंद्र व प्रदेश सरकार के सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस पहले ऐतिहासिक एयर शो में 9 हॉक एमके-132 लड़ाकू विमानों की गर्जना के बीच आसमान तिरंगे के रंगों से सराबोर हो उठा। इस गौरवमयी आयोजन का सबसे खास पहलू यह रहा कि सूर्यकिरण टीम में मेरठ के ही तीन जांबाज स्क्वाड्रन लीडर अमन गोयल, स्क्वाड्रन लीडर राहुल सिंह और स्क्वाड्रन लीडर शरद गोयल शामिल रहे, जिन्होंने इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर शहर का मान बढ़ाया।
100 से 150 फीट की ऊंचाई पर दिखाए करतब
सुबह 10:25 बजे हिंडन एयरबेस से उड़ान भरकर पहुंचे नौ हॉक जेट्स ने आसमान में प्रवेश करते ही दर्शकों को रोमांचित कर दिया। 100 से 150 फीट की ऊंचाई पर लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और डीएनए मैन्यूवर जैसे जटिल करतब दिखाए गए। जब दो विमान आमने-सामने से बेहद तेजी से एक-दूसरे को क्रॉस करते हुए निकले, तो पूरा मैदान तालियों और ‘जय हिंद’ व ‘वंदे मातरम’ के नारों से गूंज उठा। नासिक बेस रिपेयर डिपो द्वारा विकसित स्मोक पॉड्स के जरिए आसमान में उकेरी गई केसरिया, सफेद और हरे रंग की लकीरें बच्चों और युवाओं के लिए मुख्य आकर्षण रहीं।
एयर शो में स्कूली बच्चे, एनसीसी कैडेट्स, उद्यमी और आम नागरिक भी पहुंचे
राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के प्रयासों से आयोजित इस एयर शो में स्कूली बच्चों, एनसीसी कैडेट्स, उद्यमियों और आम नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ी। वर्ष 1996 में स्थापित वायुसेना की 52वीं स्क्वाड्रन (सूर्यकिरण) के इस साहसिक प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को राष्ट्रसेवा और रक्षा क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना रहा। आयोजन के दौरान जिलाधिकारी डॉ. वी.के. सिंह, सीडीओ नूपुर गोयल सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, वहीं सुरक्षा के मद्देनजर मोहिउद्दीनपुर के आसपास 18.5 किलोमीटर के दायरे को अस्थायी रेड और नो-फ्लाइंग ज़ोन घोषित किया गया था।
1996 में बनी सूर्यकिरण, 52वें स्क्वाड्रन का हिस्सा
सूर्यकिरण भारतीय वायुसेना की एयरोबैटिक प्रदर्शन टीम है और 52वें स्क्वाड्रन का हिस्सा है। इसकी स्थापना 1996 में हुई थी। टीम में 13 पायलट होते हैं, जबकि प्रदर्शन के दौरान नौ पायलट एक साथ उड़ान भरते हैं। लड़ाकू विमान उड़ाने का अनुभव रखने वाले पायलटों को टीम के लिए चुना जाता है। देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी हवाई कलाबाजियों से दर्शकों को रोमांचित कर चुकी सूर्यकिरण का मेरठ में यह पहला प्रदर्शन था। राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के अनुसार, मेरठ में एयर शो के आयोजन का प्रस्ताव 13 मई को भेजा गया था और 8 सितंबर को इसे आधिकारिक मंजूरी मिली।
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