
मुख्यमंत्री योगी की पहल से जमीन से जुड़े लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्षों से लंबित चकबंदी प्रक्रियाओं के निस्तारण को लेकर शासन स्तर पर कार्रवाई तेज कर दी गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद चकबंदी से जुड़े पुराने मामलों की समीक्षा कर उन्हें समयबद्ध तरीके से निस्तारित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में मुजफ्फरनगर के पीपलशाह गांव में करीब 16 वर्षों से लंबित चकबंदी प्रक्रिया को विधिवत पूरा कर लिया गया है। वहीं, छह जिलों के 13 गांवों को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-6(1) के तहत चकबंदी प्रक्रिया से बाहर किया गया है।


पीपलशाह में 16 साल बाद किसानों ने ली राहत की सांस
मुजफ्फरनगर जिले के पीपलशाह गांव में चकबंदी प्रक्रिया लंबे समय से लंबित थी। इसके कारण भूमि के सीमांकन और जोत से जुड़े मामलों के निस्तारण में परेशानी बनी हुई थी। प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयासों के बाद अब इस प्रक्रिया को उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम की धारा-52(1) के तहत पूरा कर लिया गया है। चकबंदी पूरी होने से गांव में भूमि संबंधी पुराने मामलों के निस्तारण और भू-अभिलेखों को व्यवस्थित करने का रास्ता साफ हुआ है। मुजफ्फरनगर की आधिकारिक वेबसाइट पर पीपलशाह को चरथावल क्षेत्र के गांव के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

छह जिलों के 13 गांव चकबंदी प्रक्रिया से बाहर
चकबंदी आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद के निर्देश पर छह जिलों के 13 गांवों को नियमानुसार चकबंदी प्रक्रिया से अलग किया गया है। इनमें कई गांव लंबे समय से चकबंदी प्रक्रिया में लंबित थे। इनमें मैनपुरी का भांती गांव सबसे लंबे समय से चकबंदी प्रक्रिया में लंबित बताया गया है।
बिजनौर: हसनअलीपुर और बैबलवाला
लखनऊ: शिवपुरी — करीब 12 वर्ष
बरेली: कादरगंज — करीब 10 वर्ष
मैनपुरी: भांती — करीब 35 वर्ष
बदायूं: सिरतौल — करीब 14 वर्ष, बक्सेना और इमलिया
उन्नाव: दरौली, पीखी, सर्लीद और निहालपुर — करीब 12 वर्ष
क्यों बाहर किए गए 13 गांव?
रिपोर्ट के अनुसार इन गांवों में चकबंदी प्रक्रिया आगे बढ़ाने में अलग-अलग व्यावहारिक और तकनीकी अड़चनें सामने आ रही थीं। कुछ गांव नई विकास योजनाओं के दायरे में आ गए, कुछ इलाकों में नदी के कटान से कृषि भूमि प्रभावित हुई। वहीं, कुछ गांवों में चकबंदी योग्य क्षेत्रफल 40 प्रतिशत से कम रह गया था। कुछ क्षेत्र औद्योगिक विकास क्षेत्र में भी शामिल हो चुके थे। ऐसे मामलों में नियमानुसार चकबंदी प्रक्रिया से गांवों को अलग किया गया।
लंबित मामलों पर पहले से सख्त है चकबंदी विभाग
चकबंदी विभाग ने वर्ष 2026 में लंबे समय से लंबित मामलों को लेकर समीक्षा तेज की है। अगस्त में चकबंदी आयुक्त ने 10 वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए प्रदेश के 136 गांवों की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की थी। अधिकारियों को पुराने मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इससे पहले जनवरी 2026 में भी प्रदेश के 23 जिलों के 43 गांवों में वर्षों से लंबित चकबंदी प्रक्रिया पूरी किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इनमें कुछ गांवों में चकबंदी 45 से 46 वर्षों तक लंबित रही थी।
किसानों को क्या होगा फायदा?
चकबंदी प्रक्रिया पूरी होने से भूमि संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और पुराने विवादों के निस्तारण में मदद मिलती है। स्पष्ट भू-अभिलेख होने से किसानों के लिए जमीन से जुड़े कामकाज और विभिन्न सरकारी कृषि योजनाओं का लाभ हासिल करना आसान हो सकता है। सरकार की ओर से चकबंदी प्रक्रिया में देरी कम करने और किसानों की समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण पर लगातार जोर दिया जा रहा है। अगस्त में विभाग ने चकबंदी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी रोकने के लिए तीन प्रतिशत से अधिक भूमि कटौती जैसे मामलों में आयुक्त की पूर्व अनुमति को भी अनिवार्य किया था।











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