
सेना में भर्ती कराने के दबाव का आरोप, परिवारों ने विदेश मंत्रालय से लगाई की मदद की गुहार
परिजनों का 30 जुलाई के बाद से नहीं हुआ कोई संपर्क
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और शामली के तीन युवकों के संदिग्ध परिस्थितियों में रूस में फंसने का मामला सामने आया है। तीनों युवक उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए रूस गये थे। इस तरह से अपना कॅरिअर बनाने के लिए विदेशों में जाते हैं और किसी न किसी झूठे मामलों में फंस जाते हैं। मुजफ्फरनगर और शामली के तीन युवकों के संदिग्ध परिस्थितियों में फंसने और लापता होने के मामले में परिजनों ने विदेश मंत्रालय और स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। परिजनों ने बताया कि तीनों युवकों से परिजनों का बीते लगभग डेढ़ महीने से कोई संपर्क नहीं हो सका है।


देश के विभिन्न राज्यों में धन ऐंठने और ठगी करके विदेश भेजने वाले मामले लगातार बढ़ रहे हैं। किसान परिवार अपने बच्चों के भविष्य बनाने के लिए उन्हें विदेश में उच्च शिक्षा दिलाने का प्रयास करते हैं और अनाधिकृत एजेंटों के झांसे में फंस जाते हैं। ऐसे अनेक मामले सामने आ चुके हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर आदि राज्यों के सैकड़ों युवक स्टडी वीजा के नाम पर रूस जाकर इस नेटवर्क में फंस चुके हैं। किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष ठाकुर पूरन सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के सैकड़ों युवक स्टडी वीजा के नाम पर रूस जाकर इस नेटवर्क में फंस चुके हैं।

परिजनों को झूठे मुकदमें में फंसाने का डर
प्राप्त विवरण के अनुसार, उच्च शिक्षा ग्रहरण कर अपना कॅरिअर बनाने का सपना लेकर विदेश गये मुजफ्फरनगर के चरथावल के बाढ़ गांव निवासी हिमांशु शर्मा, पीपलशाह गांव निवासी शक्ति पुत्र विपिन पुंडीर और शामली जिले के हसनपुर लुहारी निवासी आशू सैनी पुत्र राकेश कुमार का परिजनो से 30 जुलाई के बाद कोई फोन संपर्क नहीं हुआ और उनके फोन बंद चल रहे हैं। तीनों छात्र रूस में एक ही कमरे में रहकर पढ़ाई व काम कर रहे थे। हिमांशु की मां सुमन देवी और शक्ति के पिता विपिन पुंडीर ने बताया कि उनसे 30 जुलाई को बातचीत हुई थी। इसके बाद रक्षाबंधन के त्योहार पर बहनों ने संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन बंद होने के कारण निराशा हाथ लगी। दूसरी ओर मॉस्को स्टेट लिंग्विस्टिक यूनिवर्सिटी में भाषा विज्ञान का कोर्स कर रहे शामली के आशू सैनी की बहन अंशुल की भी 30 जुलाई को बात हुई थी और आशू ने ‘कल फिर बात करने’ की बात कही थी, जिसके बाद से उसका फोन लगातार बंद आ रहा है। पीड़ित परिवारों का गंभीर आरोप है कि रूसी प्रशासन व स्थानीय नेटवर्क द्वारा युवकों को ड्रग्स के झूठे मुकदमों का भय दिखाकर जबरन रूस की सेना में भर्ती करने का दबाव बनाया जा रहा है। फोन बंद होने और संपर्क टूटने के बाद से तीनों युवकों के घरों में कोहराम मचा हुआ है।
विश्वविद्यालय से संपर्क का प्रयास
शामली जिले के हसनपुर लुहारी निवासी छात्र आशू के परिजनों का कहना है कि उन्होंने रूस स्थित विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क साधने की कोशिश की, तो उन्हें जानकारी दी गई कि उसे रूसी सेना के लोग अपने साथ ले गए हैं। हालांकि, उन्हें किस वजह से ले जाया गया, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। आशू के पिता राकेश कुमार का यह भी दावा है कि जिस एजेंट के जरिए बेटे को विदेश भेजा गया था, वह अब मदद करने के बजाय सोशल मीडिया पर धमकियां दे रहा है। परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर बेटों की सकुशल बरामदगी और भारत वापसी की गुहार लगाई है।
विदेश मंत्रालय को दी जानकारी
स्टडी और वर्क वीजा पर गए भारतीय युवकों को वहां परिवार से बात नहीं करने दी जा रही। जो युवक रूसी सेना में शामिल होने से मना करते हैं, उन पर ड्रग्स रखने के फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर जेल भेजने या सजा दिलाने का दबाव बनाया जाता है। पूर्व में भी कई युवकों के शव भारत लाए जा चुके हैं। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से विदेश मंत्री एस. जयशंकर तक बात पहुंचाई गई है, लेकिन अभी तक क्या कार्रवाई की गई, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई।











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