
माध्यमिक शिक्षा परिषद के फैसलं से 70 जिलों में मचा हड़कंप
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने राज्य की चरमराती शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और फर्जीवाड़े को जड़ से उखाड़ने के लिए अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। बोर्ड ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश के 70 जिलों में संचालित 465 स्व-वित्तपोषित (Self-Financed) स्कूलों की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर, मेरठ हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, नोएडा, मुरादाबाद, बरेली के कई दर्जन स्कूलों पर गाज गिरी है। शिक्षा परिषद के इस औचक फैसले से पूरे सूबे के शिक्षा महकमे और स्कूल माफियाओं में हड़कंप मच गया है।


परिषद के इस औचक फैसले से पूरे सूबे के शिक्षा महकमे और स्कूल माफियाओं में हड़कंप मच गया है। यह गाज उन तथाकथित शिक्षण संस्थानों पर गिरी है, जो भौतिक रूप से बंद थे और केवल सरकारी दस्तावेजों और कागजों में फल-फूल रहे थे। कार्रवाई के दायरे में पश्चिमी यूपी, ब्रज, पूर्वांचल और अवध सहित पूरा प्रदेश शामिल है।

मुजफ्फरनगर जनपद के सात स्कूलों पर एक्शन
यूपी बोर्ड द्वारा जारी 465 स्कूलों के आदेश के अंतर्गत मुजफ्फरनगर जनपद के 7 शिक्षण संस्थान कठघरे में हैं। इसमें नेशनल पब्लिक हाई स्कूल, हरसौल की मान्यता रद्द कर दी गई है। वहीं श्री राम वैदिक इंटर कॉलेज, जनता कॉलेज, भूपखेड़ी, कल्याण देव इंटर कॉलेज, बघरा, आदर्श इंटर कॉलेज, मिर्जापुर, किसान मूक बधिर विद्यालय, मुजफ्फरनगर, भगवती देवी कन्या जूनियर इंटर कॉलेज की जांच चल रही है। डीआईओएस ने हरिकेश यादव ने पुष्टी की है कि नेशनल पब्लिक हाई स्कूल हरसौली की मान्यता रद्द की सूचना उन्हें प्राप्त हो गई है।
जाँच में नियमों का पाया गया उल्लंघन?
परिषद के सचिव भगवती सिंह द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, इन 465 विद्यालयों में पिछले दो शैक्षणिक सत्रों से पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ था। जाँच में सामने आया कि इन स्कूलों में न तो नियमित कक्षाएं संचालित हो रही थीं और न ही बोर्ड परीक्षाओं में इनका कोई भी छात्र शामिल हुआ। इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम-1921 के प्रावधान: इस कानून के तहत यदि कोई मान्यता प्राप्त स्कूल लगातार दो वर्षों तक कक्षाएं चलाने में असमर्थ रहता है या उसके छात्र बोर्ड परीक्षा में नहीं बैठते हैं, तो उसकी मान्यता कानूनन स्वतः निरस्त मानी जाती है। हालांकि, बोर्ड ने साफ किया है कि यह नियम इंटर के ‘वन-टाइम कोर्स’ या अतिरिक्त/वैकल्पिक विषयों की मान्यता पर प्रभावी नहीं होगा।
प्रयागराज मुख्यालय भी अछूता नहीं, लपेटे में आए दो दर्जन स्कूल
इस कार्रवाई की आंच पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हाथरस, मेरठ और मुजफ्फरनगर जिले से लेकर यूपी बोर्ड का गढ़ कहे जाने वाले प्रयागराज तक पहुंची है। हैरानी की बात यह है कि कार्रवाई की जद से प्रयागराज को भी नहीं बख्शा गया, जहाँ मुख्यालय के ही करीब दो दर्जन (24) स्कूलों की मान्यता खत्म कर दी गई है। यह साबित करता है कि यह ऐक्शन पूरी तरह पारदर्शी और बिना किसी भेदभाव के किया गया है। जमीनी हकीकत में इन स्कूलों के पते पर कोई शैक्षणिक गतिविधि नहीं पाई गई थी।
कार्रवाई की जद में प्रदेश के प्रमुख जिले:
पश्चिमी यूपी व ब्रज: मुजफ्फरनगर, हाथरस, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली।
पूर्वांचल व मध्य यूपी: प्रयागराज, प्रतापगढ़, फतेहपुर, कौशांबी, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, संत कबीर नगर, सुल्तानपुर, अयोध्या, बाराबंकी, अंबेडकर नगर, गोंडा, बलरामपुर।
अवध व बुंदेलखंड क्षेत्र: लखनऊ, हरदोई, इटावा, कन्नौज।
छात्रों को वास्तविक माहौल देने की ओर बड़ा कदम
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी बोर्ड का यह कदम फर्जी डिग्रियों और केवल परीक्षा के समय ‘दुकान’ खोलने वाले प्रबंधकों पर करारी चोट है। इस सख्त फैसले से न केवल फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा के गिरते स्तर में बड़ा सुधार होगा। आने वाले समय में छात्रों को केवल उन्हीं संस्थानों में प्रवेश मिल सकेगा जो वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए धरातल पर प्रतिबद्ध हैं।












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