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सुप्रीम कोर्ट को मिले पांच नए न्यायाधीश, राष्ट्रपति ने नियुक्तियों पर लगाई मुहर, जारी की गई अधिसूचना

चार राज्यों के मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त
लोकपथ लाइव, नई दिल्ली: भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में आज एक बड़ा और महत्वपूर्ण विस्तार हुआ है। देश के राष्ट्रपति ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस संबंध में आज, 1 जून 2026 को कानून मंत्रालय द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है। इन नई नियुक्तियों के साथ ही शीर्ष अदालत में जजों की कमी को दूर करने और मामलों के त्वरित निपटारे में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है।

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चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश पदोन्नत
जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, देश के अलग-अलग राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) में अपनी उत्कृष्ट सेवाएं दे रहे चार मुख्य न्यायाधीशों को पदोन्नत कर सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया है। इसके अलावा बार (Bar) से एक वरिष्ठ महिला अधिवक्ता को भी सीधे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है। ये सभी न्यायाधीश अपने पद का कार्यभार संभालने की तिथि से सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

न्यायाधीशों की आधिकारिक सूची:
1. जस्टिस शील नागू: मुख्य न्यायाधीश, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय।
2. जस्टिस श्री चंद्रशेखर: मुख्य न्यायाधीश, बॉम्बे उच्च न्यायालय।
3. जस्टिस संजीव सचदेवा: मुख्य न्यायाधीश, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय।
4. जस्टिस अरुण पल्ली: मुख्य न्यायाधीश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय।
5. श्रीमती वेंकिटा सुब्रमणि मोहना: देश की प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate)।

न्यायपालिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की ओर कदम
कानूनविदों ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए कहा है कि वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमती वेंकिटा सुब्रमणि मोहना को सीधे सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्त किया जाना देश की सर्वोच्च अदालत में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय और बड़ा कदम है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नियुक्तियां?
सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मुकदमों के भारी बोझ को देखते हुए लंबे समय से जजों के रिक्त पदों को भरने की मांग की जा रही थी। कॉलेजियम की सिफारिशों के बाद राष्ट्रपति की इस अंतिम मंजूरी से अब सुप्रीम कोर्ट अपनी पूरी कार्यक्षमता के साथ काम कर सकेगा, जिससे आम जनता को न्याय मिलने में होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा।

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