
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय में शनिवार को एक कर्मचारी ने विभागीय तानाशाही पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद कर्मचारी एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष और इसी विभाग के प्रधान लिपिक (हेड क्लर्क) अशोक कुमार मलिक ने पिछले एक साल से अपना वेतन रोके जाने के विरोध में सर्वोच्च अधिकारी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। पीड़ित कर्मचारी नेता ने कार्यालय परिसर के भीतर ही अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया है।


धरने पर बैठे प्रधान लिपिक अशोक कुमार मलिक ने मीडिया और साथी कर्मचारियों के सामने अपना दर्द बयां करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) संदीप कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। अशोक कुमार ने कहा, “पिछले लगभग एक साल से मेरा वेतन पूरी तरह से द्वेष भावना, दुर्भावना और नियम-विरुद्ध तरीके से रोका गया है। बिना किसी ठोस और कानूनी वजह के एक साल तक वेतन न देना किसी भी कर्मचारी के परिवार को भूखा मारने जैसा है।”

उन्होंने आगे बताया कि पिछले 12 महीनों से वेतन न मिलने के कारण उनका पूरा परिवार बेहद गंभीर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है और घर चलाना भी दूभर हो गया है। पीड़ित कर्मचारी ने आरोप लगाया कि जब भी उन्होंने नियमानुसार अपने रोके गए वेतन को बहाल करने की गुहार लगाई या अपने अधिकारों की बात की, तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। बीएसए द्वारा उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है और दफ्तर में पूरी तरह से तानाशाही चलाई जा रही है।
कर्मचारी संगठन के जिला अध्यक्ष के इस तरह दफ्तर के भीतर धरने पर बैठ जाने से विभाग में खलबली मच गई है। अशोक कुमार का साफ कहना है कि जब तक उनका एक साल का बकाया वेतन जारी नहीं होता और तानाशाही रवैया बंद नहीं होता, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।
हालांकि बीएसए संदीप कुमार का इस मामले में स्पष्ट कहना है कि आरोप लगाने वाले वरिष्ठ लिपिक पर विभागीय पत्रावली गायब करने, अनुशासनहीनता व्यवहार करने सहित कई मामलों में कार्रवाई हुई है। सिविल लाइन थाने में इस संबंध में शिकायत दर्ज है।












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