
लोकपथ लाइव, मुजफ्फरनगर। सांप्रदायिक दंगे के दौरान गांव मोहम्मदपुर रायसिंह में हत्या, आगजनी, तोड़फोड़ व लूट के मामले में 23 आरोपियों को एडीजे कोर्ट नंबर चार ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। भौराकलां पुलिस ने इस मामले में 27 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। इनमें से चार आरोपियों की मौत हो चुकी है।
सात सितंबर 2013 को मुजफ्फरनगर में हुआ था दंगा
मुजफ्फरनगर में 7 सितम्बर 2013 को सांप्रदायिक दंगा हुआ था। इसमे कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। आठ सितंबर को भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर रायसिंह में भीड़ ने धार्मिक नारेबाजी करते हुए दूसरे वर्ग के लोगों के घरों पर हमला बोल दिया था। भीड़ ने गांव के कई मकानों में तोड़फोड़ व लूटपाट कर आग के हवाले कर दिया था। बवाल के दौरान भीड़ ने गांव के रहीसुद्दीन की हत्या कर दी थी।


1300 अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी रिपोर्ट
इस मामले में हत्या का पहला मुकदमा एसआई गंगा प्रसाद ने 1300 अज्ञात लोगों के खिलाफ कराया था। इसमे भीड़ पर पुलिसकर्मियों के वाहनों में आग लगाने की बात सामने आई थी। इसके बाद रहीसुद्दीन के बेटे हनीफ ने दूसरा मुकदमा धार्मिक उन्माद फैलाने, हत्या व बलवा का भौराकलां थाने पर दर्ज कराया था। बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सत्येन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि मामले की सुनवाई एडीजे कोर्ट नंबर चार के न्यायाधीश कनिष्क कुमार की कोर्ट में हुई।
यह 23 आरोपी हुए बरी
विक्की, बादल, मदन, जयनारायण, ब्रजवीर, विनोद, काला, प्रवीन, अनिल, सुभाष, संजीव, करण, शेर सिंह, ऋषिपाल, सहंसरपाल, प्रमोद, जगपाल, प्रेमपाल, पप्पू, नीटू, भूरा तथा हरेंद्र निवासी मोहम्मदपुर राय सिंह, थाना भौराकलां को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। जबकि मामले के विचाराधीन के दौरान आरोपी प्रवीण, नकूल, बबलू व सूरज की मौत हो चुकी है।
एक आरोपी अन्य मामले में जेल में बंद
सांप्रदायिक दंगे के मामले में 23 आरोपियों को कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बरी किया है, जिसमे एक आरोपी एनबीडब्ल्यू के मामले में जेल में बंद है। जिस कारण वह कोर्ट में पेश नही हो सका। हालांकि सांप्रदायिक के मामले में उसे बरी कर दिया है।
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