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लखनऊ: सीएम योगी के 170 भेड़ों की मौत की उच्चस्तरीय जांच के आदेश

भेड़ों के मालिकों को प्रति भेड़ 10 हजार रुपए मुआवजा देने का ऐलान
जहर या बड़ी लापरवाही के दोषियों को बख्शा नही जाएगा: मुख्यमंत्री
लोकपथ लाइव, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के पास पार्किंग में करीब 170 भेड़ों की रहस्यमय मौत के मामले को गंभीरता से लिया है। सीएम योगी ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए और सरकार ने मृत भेड़ों के मालिकों को प्रति भेड़ 10 हजार रुपए मुआवजा देने की भी ऐलान किया। वहीं इस मामले सरकार ने कहा कि जहर या बड़ी लापरवाही के दोषियों को बख्शा नही जाएगा

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने मृत भेड़ों के मालिकों को प्रति भेड़ 10,000 रुपए मुआवजा देने की भी घोषणा की है। वहीं 170 भेड़ों की मौत पर दर्ज मामले की मड़ियांव थाने की पुलिस ने जांच शुरु कर दी है। थाने के एसएचओ शिवानंद मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच के तहत मृत भेड़ों के नमूने पोस्टमार्टम और लैब जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि भेड़ों की मौत बीमारी, जहरीले पदार्थ या किसी अन्य कारण से हुई है। गौरतलब राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के कार्यक्रम के बाद पार्किंग में फेंके गये बचे खाने को खाने के कारण 170 भेड़ों की मौत हो गई और बीमार हुई 200 भेड़ों का इलाज किया जा रहा है। इस घटना से मचे हड़कंप के बाद प्रशासन और शासन हरकत में आया और मामलें को गंभीरता से लिया। वहीं इस घटना के बाद पशुपालकों के माथे पर भी चिंता की लकीर बढ़ गई है, कि इतनी बड़ी संख्या में जानवरों की मौत के मामले में जहर दिए जाने या गंभीर लापरवाही की आशंका जताई जा रही है।

जहर दिये जाने की आशंका
‘आसरा द हेल्पिंग हैंड्स ट्रस्ट’ नाम की एनजीओ की संस्थापक चारु खरे ने इस मामले में मड़ियांव थाने में लिखित शिकायत पर पुलिस को बताया कि राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के आसपास चरने वाली करीब 170 भेड़ों की अचानक मौत का कारण या तो किसी जहरीले पदार्थ का सेवन करने से हुई या फिर किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा जानबूझकर जहर दिया जाना सकता है। चारु खरे ने इस घटना को बेहद गंभीर और संवेदनशील बताते हुए मांग की है कि सभी मृत भेड़ों का पोस्टमार्टम कराया जाए, ताकि मौत के असली कारण सामने आ सकें। यदि जांच में लापरवाही या जहर देने की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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