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वीर बाल दिवस पर कवियों ने बिखेरे राष्ट्रप्रेम के रंग

कवि सम्मेलन में शामिल हुए साहित्य प्रेमी, शिक्षक, विद्यार्थी
लोकपथ लाइव, सोनीपत: वीर बाल दिवस के पावन अवसर पर आयाजित कवि सम्मेलन में कवियों और गीतकारों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वहीं अपनी रचनाओं के जरिये कवियों ने स्कूली बच्चों व युवापीढ़ी को सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया।

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हिंदी प्रकोष्ठ, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सहयोग से , थाना कलां, सोनीपत के विद्यालय परिसर में अत्यंत हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में आयोजित कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी, शिक्षक, विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जहां कवियों की इन रचनाओं ने वीर गुरुपुत्रों के बलिदान, राष्ट्रप्रेम, संघर्ष, आशा और मानवीय मूल्यों को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. पूर्णचंद शर्मा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं अभिनेता डॉ. रामफल चहल और विशिष्ट अतिथि के रूप में संपूर्ण सिंह ने कार्यक्रम शामिल हुए। कवि सम्मेलन में आमंत्रित कविगणों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में अतिथियों ने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन नई पीढ़ी में देशभक्ति, संस्कार और हिंदी साहित्य के प्रति रुचि जागृत करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऐसे किया गया काव्य पाठ
कवि कृष्ण गोपाल सोलंकी ने जीवन में संघर्ष और आत्मबल का संदेश देते हुए पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं—
“मेहनत और लगन से मुश्किल दिन भी बीता करते हैं, कुरुक्षेत्र जब मन हो जाये तन को गीता करते हैं,
भूख, ग़रीबी और अभाव कमज़ोरी के रूप नहीं, जो इनको ताक़त कर ले वो दुनियां जीता करते हैं।”
उनके बाद दिनेश शर्मा ‘दिनेश’ ने भारत की सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रप्रेम को स्वर देते हुए पढ़ा—
“गंगा यमुना सरस्वती से उजियारा परिवेश, सिंधु कृष्णा कावेरी हैं देती सुख संदेश,
झेलम सरयू तापी करती पोषित हर खलिहान, गूंजे थल पर गूंजे नभ में जय जय हिंदुस्तान।”
सुप्रसिद्ध हास्य कवि विनीत पांडेय ने जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टि को रेखांकित करते हुए सुनाया—
“फूल बनकर महक जाना जिंदगी है, गीत सुख के गुनगुनाना जिंदगी है।
गम के बादल आएंगे और जाएंगे, गम भुला कर मुस्कुराना जिंदगी है।”
वहीं विख्यात गीतकार चरनजीत चरण ने मानवीय रिश्तों और व्यक्तित्व की महक को इन शब्दों में पिरोया—
“कुछ लोगों की दूरी खुशबू देती है, कुछ लोगों का पास महकता रहता है,
कुछ लोगों की एक ज़रा सी दस्तक से, सदियों तक इतिहास महकता रहता है।”

प्रमुख रूप से ये रहे मौजूद
विद्यालय के चेयरमैन ओ. पी. रंगा एवं प्राचार्य रामबीर सिंह ‘राम’ ने सभी अतिथियों, कविगणों एवं उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन विद्यालय के लिए गौरव का विषय है। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर शम्भू दयाल स्कूल खांडा के डायरेक्टर सत्यदेव पाराशर, कल्पना चावला विद्या पीठ के डायरेक्टर धर्मराज खत्री, शब्दश्री प्रकाशन के प्रॉपराइटर विपेंद्रपाल सिंह, श्याम पेड़ेवाले संजीत कुमार, जीतेन्द्र कुमार सहित अनेक साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

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