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लोकसभा चुनाव: हाथरस में भाजपा को चुनौती देते सपा व बसपा!

तीनों दलों के प्रत्याशियों के बाहरी होने की वजह से मतदाताओं में खामोशी

LP Live, New Delhi: पश्चिम उत्तर प्रदेश की हाथरस लोकसभा सीट पर सात मई मंगलवार को होने वाले चुनाव में भाजपा अपने वर्चस्व के सियासी जंग में हैं। यह हाईप्रोफाइल सीट भाजपा का सियासी गढ़ मानी जा रही है, लेकिन इस सीट पर सपा और बसपा ने जातीय समीकरण साधते हुए जिस चुनाव रणनीति से भाजपा को चुनौती देने का लक्ष्य साधा है। भाजपा ने यहां से मौजूदा सांसद का टिकट काटकर यूपी सरकार में मंत्री अनूप वाल्मिकी को प्रत्याशी बनाया है। इसलिए यहां इस बार त्रिकोणीय चुनावी मुकाबला होने की संभावना बनी हुई है। यह भी बता दें कि भाजपा के मौजूदा सांसद राजवीर दिलेर का टिकट कटा है उनकी हार्ट अटैक से भाजपा की एक चुनावी सभा के बाद निधन हो गया है। सियासी गलियारों में यह चर्चा भी गरमाई हुई कि भाजपा, सपा और बसपा यानी तीनों दलों के प्रत्याशी हाथरस जिले के बाहर के हैं, इसलिए मतदाताओं में भी खामोशी देखी जा रही है।

यूपी की इस लोकसभा लोकसभा सीट पर वैसे तो सभी दल जातीय समीकरण साधते हुए चुनाव की अपने पक्ष में हवा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भाजपा को अपने सियासी गढ़ को बचाने के लिए अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ रहा है। यह सीट पर अनुसूचित जाति के प्रत्याशी के लिए आरक्षित होने के कारण सभी राजनैतिक दल जातीगत आधार पर अपना प्रत्याशी खड़ा करते रहे है। भाजपा प्रत्याशी और योगी सरकार में मंत्री अनूप वाल्मिकि को टक्कर देने के लिए जहां विपक्षी गठबंधन से समाजवादी पार्टी ने जसवीर वाल्मिकी को चुनावी मैदान में उतारा है तो वहीं बहुजन समाज पार्टी ने सॉफ्ट इंजीनियर हेमबाबू धनगर को प्रत्याशी बनाकर भाजपा के तिलिस्म को तोड़ने की चुनावी रणनीति तैयार की। इन प्रत्याशियों समेत इस लोकसभा सीट पर कुल दस प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

क्या है चुनावी इतिहास
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हाथरस लोकसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद अब तक यहां 15 लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। इस सीट पर सबसे ज्यादा सात बार भाजपा के प्रत्याशी जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं, जबकि कांग्रेस ने चार, जनता पार्टी ने दो, जनता दल व रालोद ने एक-एक बार जीत दर्ज की है। साल 1962 में पहली बार हुए चुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके बाद 1967 और 1971 में भी कांग्रेस प्रत्याशी यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे। सत्ता विरोधी लहर में 1977 के चुनाव में जनता पार्टी का प्रत्याशी जीता और उससे अगला चुनाव 1980 में जनता पार्टी ने जीत हासिल की। 1984 में एक बार फिर कांग्रेस ने चौथी जीत दर्ज की। इसके बाद 1989 के चुनाव में यह सीट जनता दल के कब्जे में चली गई। इसके बाद 1991 से अब तक हाथरस लोकसभा सीट पर भाजपा ने सात बार जीत दर्ज की। इस अवधि के बीच साल 2009 राजग गठबंधन में भाजपा के समर्थन से ही रालोद प्रत्याशी ने यहां जीत दर्ज की। भाजपा के लिए विजयश्री की शुरुआत करने वाले किशनलाल दिलेर ने लगातार यहां भाजपा को चार बार जीत दिलाई। उसके बाद राजग गढबंधन से इस सीट पर रालोद की प्रत्याशी सारिका बघेल जीती, जबकि 2014 में यहां राजेश दिवाकर और 2019 में किशनलाल दिलेर के पुत्र राजवीर सिंह दिलेर निर्वाचित होकर लोकसभा पहुंचे। जिनका इस बार टिकट काटकर भाजपा ने योगी कैबिनेट में मंत्री अनूप वाल्मिकि को प्रत्याशी बनाया है।

पुरुषों से ज्यादा महिला मतदाता
पश्चिमी यूपी की लोकसभा सीटों में से एक महत्वपूर्ण माने जाने वाली हाथरस सीट पर मुस्लिम-जाट वोटरों का ज्यादा प्रभाव है। अलीगढ़ और हाथरस जिले की पांच विधानसभा क्षेत्रों से घिरी इस सीट पर 8,95,855 पुरुष वोटर और 10,34,392 महिला और 48 थर्डजेंडर समेत कुल 19,30,297 हैं। यदि सीट के जातिगत समीकरण पर नजर डाली जाए, तो सर्वाधिक जाटव 2.75 लाख, ठाकुर 2.25 लाख, जाट 1.80 लाख, ब्राह्मण 1.55 लाख, मुस्लिम 1.45 लाख, वैश्य 1.25 लाख, धनगर व यादव एक-एक लाख, कोरी 85 हजार, धोबी 80 हजार,कुशवाहा 60 हजार वाल्मीकि 40 हजार, अहेरिया 30 हजार तथा अन्य अन्य जातियों के 1,12,929 मतदाता हैं। इस सीट के लिए 2063 मतदान स्थलों पर मतदान कराया जाएगा।

प्रमुख प्रत्याशियों का राजनीतिक सफर
अनूप प्रधान खैर तहसील क्षेत्र के गांव रकराना के रहने वाले हैं। रकराना धर्मपुर के प्रधान रहे। राजनीति की शुरूआत राष्ट्रीय लोकदल से की। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में सफलता नहीं मिली। इसके बाद भाजपा में शामिल हो गए। 2012 में भाजपा के टिकट पर खैर विधानसभा क्षेत्र के भाग्य आजमाया। इसमें हार का सामना करना पड़ा। इन्हें मात्र 13.88 प्रतिशत वोट मिले थे। पार्टी में सक्रिय बने रहे। 2017 के चुनाव में पार्टी की टिकट पर जीत कर विधायक बने।र्ष 2022 के चुनाव में अनूप को दूसरी बार विधायक बनने का मौका मिला। इनकी बढ़ती सक्रियता के चलते उत्तर प्रदेश सरकार में राजस्व राज्य मंत्री बनाया गया। सपा प्रत्याशी जसवीर वाल्मीकि सहारनपुर जिले में देवबंद के निवासी और कपड़ा कारोबारी हैं, जो संगठन में प्रदेश सचिव के साथ रामपुर मनिहारन के सपा के विधानसभा प्रभारी भी हैं। पेशे से कपड़ा कारोबारी हैं। जबकि बहुजन समाज पार्टी ने हाथरस लोकसभा सीट से आगरा निवासी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हेमबाबू धनगर के पिता जेपी धनगर बसपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं।

काका हाथरसी का हाथरस
भाजपा का गढ़ बन चुकी हाथरस लोकसभा सीट राजनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा रही है, लेकिन हिंदी जगत के सुविख्यात हास्य कवि काका हाथरसी की जन्मभूमि व कर्मभूमि भी हाथरस ही रही है। यहीं नहीं यहां बनाए जाने वाले मसाले खासतौर से हींग की खूशबू पूरे देश में लोगों के व्यंजनों के स्वाद में जायका पैदा कर रही है। भारत में ही नहीं, बल्कि हाथरस के हींग की सुंगन्ध कई विदेशी राष्ट्रपति के अलावा सऊदी अरब के किंग भी स्वाद के साथ चख चुके हैं।

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